0 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ जनहित याचिका पर चल रही है सुनवाई
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार मामले में चल रही सुनवाई में स्कूल शिक्षा सचिव गैरहाजिर रहे। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की स्पेशल डिवीजन बेंच ने चेतावनी देते हुए कहा कि कोर्ट को मजाक में न लें। साथ ही आदेश दिया कि सचिव अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर शपथ पत्र पेश करें।
निजी स्कूलों पर कोर्ट की गंभीर टिप्पणी
कोर्ट ने साफ शब्दों में पूछा कि प्रदेश में चल रहे गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। इससे पहले पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने तीखी टिप्पणी की थी कि गली-मोहल्लों में बिना मान्यता के नर्सरी स्कूल ऐसे खोले जा रहे हैं जैसे पान की दुकान हो। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है और स्कूल मालिक मर्सिडीज में घूम रहे हैं। कोर्ट ने कहा था कि 2013 से नर्सरी स्कूलों को मान्यता लेने का प्रावधान है, फिर भी आज तक बिना अनुमति स्कूल चल रहे हैं, यह सीधा अपराध है।
शासन के जवाब से कोर्ट असंतुष्ट
इस बार हुई सुनवाई में शासन की ओर से पेश जवाब को कोर्ट ने असंतोषजनक पाया और आदेश दिया कि शिक्षा सचिव खुद बताएंगे कि अब तक ऐसे स्कूलों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को तय की गई है।
गौरतलब है कि कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने निजी प्री प्राइमरी/नर्सरी स्कूलों के बिना मान्यता के संचालन को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। वहीं शिक्षा के अधिकार को लेकर भगवंत राव ने जनहित याचिका दायर कर रखी है। याचिका में कहा गया है कि बिना मान्यता के नर्सरी स्कूल भी बड़ी संख्या में चल रहे हैं। वहीं निजी स्कूल दस प्रतिशत कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे।


