रायपुर। छत्तीसगढ़ पावर कंपनी की याचिका पर तेलंगाना से बिजली की बकाया राशि वसूली के लिए  नियामक आयोग 21 जनवरी को सुनवाई करेगा। आयोग ने तेलंगाना, और छत्तीसगढ़ पावर कंपनी को नोटिस जारी किया था।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दोनों राज्यों को साफ कर दिया है कि याचिका पर सुनवाई होगी। इसके लिए 21 जनवरी की तिथि निर्धारित की है।

छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने करीब 36 सौ करोड़ की बिजली बिल वसूली के लिए नोटिस जारी किया था, मगर तेलंगाना राशि देने से मना कर रही है। इसके बाद बिजली की बकाया राशि वसूलने के लिए छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी ने पहले हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी और फिर कोर्ट से याचिका वापस लेकर नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है।

बताया जा रहा है कि तेलंगाना से बिजली आपूर्ति के बाद भुगतान को लेकर पिछले छह साल से विवाद चल रहा है। रमन सिंह सरकार में तेलंगाना के साथ बिजली बेचने को लेकर समझौता हुआ था। जिसमें छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड अलग-अलग समय एक हजार मेगावाट तक बिजली आपूर्ति करती रही है। यह बिजली जांजगीर के मड़वा प्लांट से दी जाती रही है। शुरुआत में सब कुछ ठीक चलता रहा। बाद में तेलंगाना बिजली बोर्ड ने बिजली बिल का भुगतान बंद कर दिया।

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बताया गया कि बिजली बिल की राशि बढकऱ 36 सौ करोड़ तक पहुंच चुकी है। पिछली सरकार ने भी बिजली बिल के भुगतान के लिए दबाव बनाया गया था। तब छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी, और तेलंगाना के अफसरों के साथ बैठक भी हुई थी। तेलंगाना बिजली की बकाया राशि 21 सौ करोड़ मान रहा है। बकाया भुगतान के लिए किस्तों में राशि देने पर तेलंगाना सरकार ने सहमति दी थी, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी ने बिजली आपूर्ति बंद कर दी।

उधर, तेलंगाना में सरकार बदलने के बाद कांग्रेस की रेवंत रेड्डी सरकार ने छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी के साथ बिजली खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार पर छत्तीसगढ़ से बिजली खरीदी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। यह कहा गया कि बिना टेंडर के छत्तीसगढ़ से अधिक दर पर बिजली खरीदी की गई और इससे तेलंगाना बिजली बोर्ड को 13 सौ करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। तेलंगाना सरकार बकायदा इसकी न्यायिक जांच करा रही है, और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित हुई है। इसकी जांच चल रही है।

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दूसरी तरफ, राज्य पॉवर कंपनी की नई याचिका के बाद बिजली के भुगतान के विवाद का निपटारा जल्द होने की उम्मीद कम है। वजह यह है कि तेलंगाना बोर्ड के पास खिलाफ में फैसला आने पर केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग जाने का विकल्प रहेगा। बहरहाल, पॉवर कंपनी बकाया राशि की वसूली के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।