टीआरपी डेस्क: 22 सितंबर 2025 को भारत में जीएसटी 2.0 लागू होने के साथ कई घरेलू सामान, कारें और बीमा पॉलिसियां सस्ती हो गईं। इस बदलाव से शेयर बाजार में सकारात्मक असर की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के H-1B वीजा शुल्क बढ़ाने के ऐलान ने बाजार का माहौल बिगाड़ दिया। सोमवार को बाजार खुलने के मात्र दो मिनट में सेंसेक्स 475 अंक गिरकर 82,151.07 पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों को 1.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

शेयर बाजार में गिरावट

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स सुबह 9:32 बजे 175.71 अंक गिरकर 82,450.52 पर कारोबार कर रहा था। शुक्रवार को भी सेंसेक्स 82,626.23 पर गिरावट के साथ बंद हुआ था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दो मिनट में 115.45 अंक गिरकर 25,211.60 पर आ गया। हालांकि, 9:35 बजे तक निफ्टी में मामूली रिकवरी देखी गई और यह 22 अंक गिरकर 25,301.85 पर कारोबार कर रहा था।

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आईटी शेयरों पर भारी गिरावट

H-1B वीजा शुल्क बढ़ने से भारतीय आईटी कंपनियों की लागत में वृद्धि होगी, जिसका असर उनके शेयरों पर दिखा। प्रमुख आईटी कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई है। टीसीएस 2.23% की गिरावट, इंफोसिस 2.07% की गिरावट, टेक महिंद्रा 4% से अधिक की गिरावट, एचसीएल टेक 2% की गिरावट देखी गई है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर स्थिर रहा।

निवेशकों को भारी नुकसान

सेंसेक्स के निचले स्तर पर पहुंचने पर बीएसई का मार्केट कैप 4,64,76,608.46 करोड़ रुपये रहा, जो शुक्रवार के 4,66,32,723.37 करोड़ रुपये से 1,56,114.91 करोड़ रुपये कम था। यह दो मिनट में निवेशकों का भारी नुकसान दर्शाता है।

बाजार पर असर

H-1B वीजा शुल्क वृद्धि से भारतीय आईटी कंपनियों को विदेशी परियोजनाओं में अधिक लागत वहन करनी होगी, जिसने बाजार में नकारात्मक माहौल बनाया। हालांकि, जीएसटी 2.0 के लागू होने से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कमी की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक नीतिगत फैसलों ने बाजार की चमक फीकी कर दी।

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