टीआरपी डेस्क। NGO Scam : राज्य के बहुचर्चित ₹1,000 करोड़ के NGO घोटाले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने CBI जांच को हरी झंडी दिखा दी है। कोर्ट ने पूर्व मुख्य सचिव सहित 11 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं।

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल) ने स्पष्ट किया कि CBI 5 फरवरी 2020 को दर्ज FIR क्र. RC2222020A0001 के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ाएगी। यदि FIR पुनः दर्ज की जाती है, तो CBI को 15 दिनों के अंदर सभी संबंधित विभागों से मूल दस्तावेज जब्त करने होंगे।

जानें पूरा मामला

राज्य समाज कल्याण विभाग के अधीन राज्य स्रोत नि:शक्तजन संस्थान में फर्जी NGO बनाकर सरकारी योजनाओं की धनराशि का दुरुपयोग किया गया। RTI और विशेष ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर ₹5.67 करोड़ की अनियमितता पाई गई, लेकिन घोटाले की कुल रकम ₹1,000 करोड़ तक पहुंचती है। 31 प्रकार की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ, जिसमें अग्रिम राशि के दुरुपयोग, बिना अनुमोदन के राशि हस्तांतरण और फर्जी खर्चों का उल्लेख है।

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कैसे हुआ मामले का खुलासा ?

रायपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर (जो पहले इस NGO में कार्यरत थे) ने RTI के माध्यम से पूरे मामले का पर्दाफाश किया। इसके बाद उन्होंने वकील देवर्षि ठाकुर के माध्यम से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की और जांच में पूरे मामले का खुलासा हुआ।

इन बड़े अधिकारियों पर लगे आरोप

पूर्व IAS अधिकारियों में आलोक शुक्ला, विवेक ढांड, एमके राउत, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, पीपी सोती के नाम सामने आए हैं, जबकि राज्य सेवा के अधिकारियों में सतीश पांडे, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडे, पंकज वर्मा के नाम भी सामने आए हैं।

मामले में हाई कोर्ट ने पहले ही CBI जांच के आदेश दिए थे, जिस पर CBI ने जबलपुर में FIR दर्ज की थी। आरोपी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया की त्रुटियों के आधार पर हाई कोर्ट को दोबारा सुनवाई का आदेश दिया। अब हाई कोर्ट ने दोबारा सभी पक्षों को सुनकर CBI जांच को वैध ठहराया है।

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कैसे होगी आगे की कार्रवाई ?

CBI को 15 दिनों में के अंदर दस्तावेज जब्त करने होंगे। कोर्टल ने CBI को जांच निष्पक्ष और शीघ्रता से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह छत्तीसगढ़ की सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जा रहा है।

NGO Scam : छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास के इस सबसे बड़े घोटाले में अब CBI की जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। हाई कोर्ट का फैसला यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी रसूखदार कानून से ऊपर नहीं है।