कोरबा। SECL की खदानों से प्रभावित ग्रामीणों की समस्या सुनने के लिए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल शुक्रवार को कोरबा जिले के हरदी बाजार पहुंचे। इस दौरान बघेल ने उन ग्रामीणों से संवाद किया, जिनकी भूमि कोयला खदान विस्तार के लिए अधिग्रहित की जानी है। इस मौके पर यह बात सामने आई कि खदान के लिए अधिसूचना 2004 में जारी की गई और जमीन आज ली जा रही है। ऐसे में आज की दर और नियम के मुताबिक मुआवजा और रोजगार दिया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की समस्याएं और चिंताएं सुनने के बाद बघेल ने स्पष्ट कहा कि “जब तक प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और रोजगार की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक किसी भी तरह का भूमि अधिग्रहण स्वीकार्य नहीं होगा।”

इस दौरान पूर्व विधायक बोधराम कंवर समेत सैकड़ों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने भूपेश बघेल को बताया कि एसईसीएल प्रबंधन द्वारा अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन प्रभावित परिवारों को आज तक स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया गया कि उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा और उनके परिजनों को नौकरी किस स्वरूप में दी जाएगी। ग्रामीणों ने कहा कि पीढ़ियों से उनकी जीविका खेती और जमीन पर आधारित है। यदि बिना उचित व्यवस्था के जमीन छीन ली गई तो उनके सामने रोज़गार और जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा।

‘जनता का भविष्य दांव पर न लगाएं’
भूपेश बघेल ने ग्रामीणों की पीड़ा सुनने के बाद कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा किसानों, मजदूरों और विस्थापितों के साथ खड़ी रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और एसईसीएल प्रबंधन को यह समझना होगा कि विकास की कीमत पर आम जनता का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता। बघेल ने साफ कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को लिखित में मुआवजा राशि और नौकरी की शर्तें नहीं दी जातीं, तब तक अधिग्रहण का कोई औचित्य नहीं है।
बघेल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अधिग्रहण में 2004 का नियम नहीं चलेगा, बल्कि प्रबंधन 2019 को राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम का पालन करे और प्रभावितों को मुआवजा और नौकरी दे।

उन्होंने आगे कहा कि कोयला उत्पादन देश की जरूरत है, लेकिन इसके नाम पर स्थानीय लोगों का हक़ मारा नहीं जा सकता। यदि प्रबंधन एकतरफा कार्रवाई करेगा तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान से ग्रामीणों में उत्साह देखा गया और उन्होंने बघेल को भरोसा दिलाया कि वे अपनी जमीन और अधिकार बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। भूविस्थापितों के हक के लिए अगर आंदोलन किया जाता है तो कांग्रेस के सभी 35 विधायक खदान में आकर धरना देंगे।इस मौके पर हरदीबाजार सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोग हजारों की संख्या में पहुंचे। इनमें से अधिकांश SECL की कोयला खदान से प्रभावित हैं और 2004 की बजाय वर्तमान समय में लागू भूअधिग्रहण अधिनियम के आधार पर नौकरी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।


