0 जल-जंगल-जमीन की रक्षा हेतु प्रशासनिक प्रस्ताव का किया कड़ा विरोध
रायगढ़। तमनार विकासखंड के ग्राम पंचायत आमगांव के ग्रामीणों ने जिंदल पावर प्लांट के कोल माइंस के लिए आगामी 14 अक्टूबर को कलेक्टर रायगढ़ में प्रस्तावित जनदर्शन व जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग उठाई है। इसके लिए गाँव के लगभग सैकड़ों महिला-पुरुष जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीण रायगढ़ पहुंचकर प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्राम आमगांव में इस मुद्दे पर आयोजित बैठक में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रत्येक घर से एक सदस्य रायगढ़ जाकर अपना विरोध जताएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि गाँव की जल-जंगल-जमीन किसी भी कीमत पर कंपनी को नहीं बेची जाएगी। गारे-पेलमा सेक्टर-1 हेतु कंपनी व शासन-प्रशासन द्वारा मांगी गई भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति को वे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
विस्थापन और प्रदूषण का दंश
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वजों की धरोहर रही यह उपजाऊ भूमि पीढ़ी दर पीढ़ी से उनकी आजीविका का आधार है। यहाँ की जमीन पर वे पाँच पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं। ऐसे में इसे किसी भी सूरत में बेचना स्वीकार नहीं है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि कंपनी क्षेत्र में आई तो वन व पर्यावरण प्रदूषण फैलेगा, जिससे फसलों को नुकसान होगा। पशुओं के लिए चारा-पानी की समस्या बढ़ेगी, वहीं बाहरी लोगों के प्रवेश से ग्रामीण रोजगार से वंचित हो जाएंगे।
ग्रामवासियों ने आगे कहा कि हजारों ट्रेलर वाहनों के लगातार आवागमन से दुर्घटनाएँ होंगी और जन-धन की हानि की आशंका बढ़ेगी। विस्थापित होकर दर-दर भटकना पड़ेगा और गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

रैली निकलकर पहुंचे कलेक्ट्रेट
ग्राम पंचायत आमगांव में जिंदल पावर प्लांट के गारे पेलमा सेक्टर-1 ओपनकास्ट कम अंडरग्राउंड कोल माइंस के प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लेकर ग्रामीणों में भारी विरोध देखने को मिला। सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर आगामी लोक सुनवाई को रद्द करने की मांग की।
दोपहर लगभग 12 बजे आमगांव के ग्रामीण अंबेडकर चौक पर इकट्ठा हुए। यहां से उन्होंने प्लांट के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर रैली निकाली। ग्रामीणों ने जोर-शोर से नारे लगाते हुए कहा कि वे अपने सरकारी, निजी और वन भूमि को किसी भी हाल में जिंदल पावर लिमिटेड को नहीं देंगे।

ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा “गांव का नाम, ब्लॉक, जिला और राज्य तब तक अस्तित्व में रहेंगे जब तक जल-जंगल-जमीन हमारी होगी। कंपनी को जमीन देना हमारे लिए संभव नहीं। इसलिए हम आगामी जनसुनवाई का कड़ा विरोध करते हैं।”


