टीआरपी। Bageshwar Dham :
मध्यप्रदेश के बागेश्वर धाम वाले प्रसिद्ध पं.धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज तीसरी बार राजधानी पहुंच रहे हैं। वे 4 से 8 अक्टूबर तक गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में हनुमत कथा की व्याख्या करेंगे। इस दौरान दिव्य दरबार लगाकर भक्तों की समस्या का समाधान भी करेंगे। महाराज कहते हैं कि रायपुर शहर उनकी मौसिया का गांव है, यानी भगवान श्रीराम की माता कौशल्या का मायका है। इसी शहर में आने के बाद से उनकी प्रसिद्धि देशभर में फैली। उनके कथा स्थल पर धर्मातंरण करने वालों की घर वापसी का बड़ा आयोजन हुआ था। इसके बाद ही छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के खिलाफ अभियान ने जोर पकड़ना शुरू किया है।


गुढ़ियारी में होने वाली कथा के आयोजक बसंत अग्रवाल ने बताया कि पं.धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज जहां पर भी कथा करते हैं, वे रायपुर छत्तीसगढ़ का नाम लेने से चूकते नहीं है। वे अपनी हर कथा में कहते है कि रायपुर उनका मौसिया का गांव है। क्योंकि, यह भगवान श्रीराम का नौनिहाल है। पहली बार वे यहां कथा करने आए थे तब उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में भक्त कथा सुनने पहुंचेंगे। रायपुर के बाद ही उन्हें और अधिक ख्याति प्राप्त हुई।

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’कई वीईआईपी आएंगे कथा सुनने’


कथा सुनने के लिए इस बार कई बड़े वीआईपी आने वाले है। जिनमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उनकी धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय, उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव, विजय शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डा. रमन सिंह, उनकी धर्मपत्नी वीणा सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, मंत्रिमंडल के सहयोगी, रायपुर के चारों विधायक सहित निगम, मंडल के सदस्य, नगर निगम की महापौर मीनल चौबे, सभापति सूर्यकांत राठौर आदि पहुंचेंगे।


’फोर व्हीलर से न आएं


आयोजकों ने आम जनता से अपील की है कि वे कथा सुनने के लिए कार में न आएं। कारों के काफिलों से यातायात जाम होने की नौबत आती है। या तो बाइक से आएं अथवा पैदल आएं। बुजुर्ग और विकलांग लोगों के लिए 200 से अधिक ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु निःशुल्क ई रिक्शा से पंडाल स्थल तक पहुंच सकते हैं।


पंडाल में ठहरने वालों के लिए भंडारा


बाहर से आने वाले भक्तों के लिए रोजाना रात्रि 9 और सुबह 10 बजे भोजन (भंडारा) की व्यवस्था की जाएगी। कथा समाप्ति के बाद सभी भक्तों के लिए प्रसादी की भी व्यवस्था की गई है। पंडाल में पहले आओ – पहले पाओ की व्यवस्था रहेगी। रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के सभी जिलों, पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र के भक्तों में कथा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

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