टीआरपी। Mukhymantri Tirth Darshan Yojna : उम्र के 70वें पड़ाव पर पहुंच चुकीं ग्रामीण महिला बूंदकुंवर ने बरसों पहले अयोध्या जाने का मन बनाया था। सोचते सोचते उम्र गुजर गईं लेकिन उनका सपना अब कहीं जाकर मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत शुरू की गई निःशुल्क यात्रा योजना से पूरा हुआ है। अयोध्या में श्रीराम लला का दर्शन करते ही वृद्ध महिला की आंखें छलक उठीं।

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना

तीर्थयात्रियों के साथ अयोध्या दर्शन कर लौटीं वृद्ध महिला बूंदकुंवर बतातीं हैं कि उसका जीवन संघर्षों में ही बीता। पति के निधन के बाद अपने बेटे तथा बहू के साथ सादगीपूर्ण जीवन जीती रहीं। वे प्रतिदिन सोचा करतीं कि जीवन में एक बार भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या का दर्शन करने जाएंगी। सीमित साधन और बुजुर्ग होने के कारण महिला का यह सपना अधूरा रह गया था। छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की जानकारी उनके गांव तक पहुंची, तब एक नई आशा जागी।

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महिला बूंदकुंवर ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए आवेदन किया और उसका चयन हो गया। महिला बतातीं हैं कि उनके साथ सहयोगी पल्लवी और गीता भी यात्रा में थीं, जिन्होंने उनका पूरा सहयोग किया। बूंदकुंवर ने अपने गांव जटगा से बिलासपुर तक बस में सफर किया। फिर बिलासपुर से अयोध्या तक सरकार की निःशुल्क तीर्थ दर्शन योजना के तहत चलाई जा रही ट्रेन से अयोध्या धाम पहुंचीं। अयोध्या में भगवान श्री रामलला के दर्शन कर लौटने के बाद वह गांव में अपनी यात्रा और सरकार की इस योजना की तारीफें करते नहीं थकतीं।

महतारी वंदन योजना से एक हजार

जटगा गांव की बूंदकुंवर ने बताया कि जब उन्होंने रामलला के दर्शन किए, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीवन में भगवान श्री रामलला के दर्शन कर पाऊंगी। महिला अभी बेटा-बहू के साथ गांव में रहती है। उन्हें महतारी वंदन योजना से भी हर माह एक हजार रुपए मिलते हैं।

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