मुंगेली। सरकार अगले महीने से नई फसल की धान की खरीदी शुरू करने जा जा रही है और अब भी पिछले वर्ष की धान खरीदी में हुए घोटाले उजागर हो रहे हैं। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के तरवरपुर धान खरीदी केंद्र में 65 लाख रुपये से अधिक मूल्य के सरकारी धान के गबन के मामले में एफआईआर दर्ज किया गया। इस मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए 24 घंटे के भीतर ही आरोपी खरीदी केंद्र प्रभारी को गिरफ्तार कर लिया है।

65 लाख के धान का नहीं मिला स्टॉक

गिरफ्तार आरोपी सरजू बघेल, खरीदी केंद्र तरवरपुर में प्रभारी के पद पर पदस्थ था। जांच में सामने आया कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान उसने 2094.64 क्विंटल धान का कोई लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया। यह धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 65,02,684 रुपये कीमती था, जो रिकॉर्ड में दर्ज तो था, लेकिन भौतिक रूप से कहीं उपलब्ध नहीं पाया गया।

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FIR के बाद तत्काल कार्रवाई

तरवरपुर केंद्र की अनियमितता की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सेतगंगा शाखा के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के प्रबंधक सुमरन दास मानिकपुरी ने फास्टरपुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस आधार पर थाना फास्टरपुर में अपराध क्रमांक 65/2025 दर्ज कर, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4) एवं 316(5) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की गई।

पुलिस ने ग्राम फंदवानीकापा स्थित आरोपी के घर दबिश दी। सरजू बघेल ने पुलिस को देख मौके से भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने गबन की बात कबूल की। उसके पास से धान खरीदी रजिस्टर और अन्य आवश्यक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

जांच में हुआ ये खुलासा

सहायक आयुक्त सहकारिता हितेश श्रीवास द्वारा की कराई गई जांच में स्पष्ट हुआ कि वर्ष 2024-25 के खरीफ सीजन में कुल 39767.20 क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इसमें से 36404.36 क्विंटल धान का परिदान किया गया, जबकि 2094.64 क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी भरपाई या जवाबदेही नहीं दी गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह भी सामने आया कि ऑनलाइन सिस्टम में धान दिखाया गया, लेकिन भौतिक सत्यापन में वह मौजूद नहीं था। यह घोर अनियमितता और अमानत में खयानत का मामला बना। इस कार्रवाई से जिला प्रशासन और पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय योजनाओं में फर्जीवाड़ा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कलेक्टर कुंदन कुमार के निर्देश पर शुरू हुई यह कार्रवाई अब जिले में अन्य खरीदी केंद्रों की जांच के लिए भी आधार बन सकती है।

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