0 कोरबा के प्रदूषण को लेकर पहले भी हाई कोर्ट में दायर हो चुकी है जनहित याचिका

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कोरबा में कोयला परिवहन, फ्लाई ऐश प्रबंधन और बढ़ते प्रदूषण को लेकर स्वतः संज्ञान में दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि कोरबा की मौजूदा पर्यावरणीय स्थिति बेहद चिंताजनक है और भारी वाहनों का दबाव, सड़कों की बदहाली और उड़ती राख से नागरिकों का जीवन संकट में है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में हुई सुनवाई में निर्देश दिया कि बालको को इस मामले में आवश्यक पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि एक दिन के भीतर बालको को नोटिस जारी कर कोर्ट में पक्षकार के रूप में शामिल किया जाए, जबकि राज्य सरकार के वकील को बालको को कोर्ट आयुक्त की रिपोर्ट की प्रति भेजने के निर्देश दिए गए।

वाणिज्य और उद्योग सचिव को हलफनामा जमा करने को कहा

कोर्ट ने यह भी कहा कि कोरबा क्षेत्र के सभी थर्मल पावर प्लांट्स को पर्यावरण नियंत्रण के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इस संबंध में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिवों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि इन रिपोर्टों को राज्य के मुख्य सचिव के संज्ञान में लाया जाए, ताकि वे इस पर अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल करें और बताएं कि अब तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

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कोर्ट आयुक्त ने बताया– कोरबा की हालत बेहद खराब

कोर्ट आयुक्त रवींद्र शर्मा ने 8 अक्टूबर को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में बताया कि कोरबा में कोयला और फ्लाई ऐश परिवहन के कारण सड़कों की हालत बेहद खराब है। भारी ट्रकों से गड्ढे और धूल प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे हादसे और श्वसन रोगों में इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कारखानों की चिमनियां शहर के बीचों बीच हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है।

अदालत ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों को अब कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर वास्तविक सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की नियमित मॉनिटरिंग जारी रहेगी।

पूर्व में ऐसे ही मामले की हो चुकी है सुनवाई

बताते चलें कि इससे पूर्व भी हाईकोर्ट में कोरबा में व्याप्त प्रदूषण को लेकर जनहित याचिका दायर हो चुकी है। मुख्य न्यायाधीश सिन्हा ने गंभीरता दिखाते हुए न्याय मित्रों की एक टीम कोरबा भेजकर रिपोर्टिंग भी कराई। तब भी बिजली कारखानों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण को लेकर न्याय मित्रों ने काफी चिंता जताई थी। मगर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि पूर्व में इस मामले की सुनवाई NGT में हो चुकी है, इसलिए याचिकाकर्ता NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में पास जाए।

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