टीआरपी डेस्क। दुनिया भर के देशों में मुद्रा को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक स्थापित हैं, जो अपने-अपने नियमों के तहत करंसी जारी करते हैं। इस क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में एक अनूठा कदम उठाया, जब उसने दुनिया की पहली पॉलिमर (प्लास्टिक) करंसी जारी की। इस कदम ने कई देशों को आश्चर्यचकित किया और पॉलिमर करंसी को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई।

पहली पॉलिमर करंसी

रॉयल बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में 10 डॉलर का पॉलिमर नोट जारी किया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के 200 साल के उत्सव की झलक थी। इस नोट को टिकाऊ बनाने का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। कागजी नोटों की तुलना में पॉलिमर नोट का जीवनकाल 2.5 से 4 गुना अधिक होता है, जिसके कारण इसे लागत प्रभावी और सुरक्षित माना गया।

दुनिया में इसका प्रभाव

ऑस्ट्रेलिया की इस पहल के बाद कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, नाइजीरिया, वियतनाम और रोमानिया जैसे देशों ने भी पॉलिमर करंसी को अपनाया। इन नोटों की टिकाऊ प्रकृति और नकली बनाने में जटिलता ने इसे वैश्विक मुद्रा प्रणाली में एक पसंदीदा विकल्प बनाया।

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