टीआरपी डेस्क। Impact of US-China tensions : पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स 1,293.65 अंक या 1.59% की बढ़त के साथ बंद हुआ। दिग्गज कंपनियों के शेयरों का प्रमुख योगदान रहा, जहां टॉप-10 वैल्यूएबल कंपनियों में से आठ की मार्केट वैल्यू में उछाल आया। इसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस और एचडीएफसी बैंक टॉप पर रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मार्केट कैप भी बढ़ी। कुल मिलाकर, आठ कंपनियों की वैल्यू में 1.94 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।

ट्रंप का टैरिफ ऐलान और चीन का पलटवार

हालांकि, सप्ताह के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी। ट्रंप ने चीन से आयातित सामानों पर 1 नवंबर 2025 से 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो वर्तमान टैरिफों पर अतिरिक्त होगा। यह कदम चीन द्वारा रेयर अर्थ तत्वों के निर्यात पर लगाए गए नियंत्रणों के जवाब में उठाया गया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए चीन पर व्यापार में आक्रामक रुख अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिका भी इसी तरह जवाब देगा।

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चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी, कहा कि ये कदम चीन के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं और द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को कमजोर करते हैं। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि चीन लड़ना नहीं चाहता, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करेगा।

वैश्विक बाजारों पर तत्काल प्रभाव

ट्रंप के ऐलान के बाद शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। नैस्डैक 3.56%, एसएंडपी 500 2.71% और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.90% लुढ़का। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव उभरते बाजारों, विशेषकर भारत पर दबाव डालेगा। एनरिच मनी के पोनमुडी आर ने कहा कि निवेशकों की धारणा कमजोर होने से शेयरों और मुद्रा पर असर पड़ेगा।

आगामी सप्ताह के प्रमुख कारक

अगले सप्ताह भारतीय बाजार में उथल-पुथल की संभावना है। जिसमे प्रमुख फैक्टर देखने को मिल सकते हैं। पहला कॉर्पोरेट आय से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि, दूसरी तिमाही के परिणाम घोषित होंगे, जिसमें एचसीएल टेक्नोलॉजीज और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शामिल हैं। ये नतीजे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं इसके अलावा, 13 अक्टूबर को सितंबर मासिक खुदरा महंगाई और 14 अक्टूबर को थोक महंगाई के आंकड़े जारी होंगे, जो नीतिगत फैसलों  को प्रभावित करेंगे। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के अनुसार, ये आंकड़े बाजार की चाल पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वहीं विशेषज्ञों की सलाह है कि, निवेशक वैश्विक संकेतों पर नजर रखें और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें।

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