टीआरपी। Ahoi Ashtami : हिंदू पंचांग के कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी पर्व मनाए जाने की परंपरा चली आ रही है। पुत्र की रक्षा और लंबी उम्र की कामना के लिए अहोई माता का पूजन किया जाता है। दिनभर व्रत रखकर शाम होने के पश्चात तारा देखकर अर्घ्य देकर व्रत का पारणा किया जाता है। इस वर्ष 2025 में अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 14 अक्टूबर को सुबह 11.09 बजे तक तक हैं। चूंकि अष्टमी पर पूजन और तारा देखने की रस्म रात्रि में निभाई जाती है, इसलिए 13 अक्टूबर को ही अहोई अष्टमी का पूजन किया जाएगा।

शुभ मुहूर्त

शाम 5.53 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 7.08 बजे तक है।

अर्घ्य देने का समय

तारों को अर्घ्य देने का समय शाम 6.17 बजे तक है।

पूजन विधि

सुबह स्नान करके गंगाजल का छिड़काव करें। दीवार पर कुमकुम से अहोई माता की फोटो बनाएं। अहोई माता की फोटो के समक्ष दीपक प्रज्वलित करके थाली में फूल, फल और मिठाई, दान की चीजें और पूजन की सामग्री रखें। भोग लगाएं। पूजन कर कथा कहानी पढ़कर, बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना करें। शाम को तारा निकलने पर अर्घ्य दें। बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और व्रत का पारणा करें।

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