कोरबा। महिला एवं बाल विकास विभाग कोरबा की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश को आखिरकार यहां से हटा दिया गया है। विभाग में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार, मानसिक उत्पीड़न और ‘रिश्वत वसूली’ के गंभीर आरोपों के ठीक बाद संचालनालय ने यह कार्रवाई की है। हालांकि आदेश में उनके पूर्व में किए गए तबादले का जिक्र है और सचिव स्तरीय समिति द्वारा किए गए फैसले के तहत उन्हें हटाने की बात कही गई है।
संचालनालय महिला एवं बाल विकास, छत्तीसगढ़ के संचालक पदुम सिंह एल्मा के हस्ताक्षर से जारी आदेश में रेनु प्रकाश को एकतरफा भारमुक्त करते हुए उनका स्थानांतरण कोंडागांव कर दिया गया है। आदेश तत्काल प्रभावशील किया गया है। विभाग ने जिला कार्यक्रम अधिकारी का प्रभार अस्थायी रूप से गजेंद्र देव सिंह को सौंपा है। शासन की कार्यवाही के बाद लंबे समय से दबाव में काम कर रहे विभाग के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।
जून के महीने में किया गया था ट्रांसफर
दरअसल कोरबा में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) रेणु प्रकाश का जून के महीने में ही कोंडागांव जिले में तबादला कर दिया गया था, मगर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण लेते हुए स्टे ले लिया था। हालांकि इससे पूर्व और बाद में रेणु प्रकाश के कामकाज को लेकर काफी शिकायतें भी हुईं। साथ ही रेडी टू ईट और सामग्रियों की सप्लाई में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे।
बता दें कि पिछले दिनों ही कोरबा की परियोजना अधिकारी ममता तुली ने रेणु प्रकाश के ऊपर आरोप लगाया था कि उन्होंने अलग से 50 हजार रुपए मांगे और देर शाम तक बिठाकर काफी प्रताड़ित किया। दिव्यांग ममता ने बताया कि इस दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। ममता ने अपनी शिकायत में बताया कि DPO द्वारा उनके अवकाश को स्वीकृत करने में लंबे समय से आनाकानी की जा रही थी।
इस शिकायत के हफ्ते भर बाद ही रेणु प्रकाश के तबादले का आदेश जारी कर दिया गया। उन्हें कोंडागांव में किए गए तबादले से स्टे मिला था, विभाग ने उन्हें एकतरफा कार्यमुक्त करते हुए सीधे कोंडागांव में ज्वाइन करने का आदेश दिया गया है।




