टीआरपी डेस्क। भारतीय सेना में शामिल अग्निवीरों के लिए बड़ी राहत की संभावना है। सेना में 25 फीसदी के स्थान पर 75 फीसदी अग्निवीरों को स्थाई किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस पर चर्चा 23 अक्टूबर से जैसलमेर में शुरू होने वाले सेना कमांडरों के सम्मेलन में की जाएगी। वर्तमान में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद केवल 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित किया जाता है, जबकि शेष 75 फीसदी रिटायर हो जाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, अग्निवीरों का पहला बैच अगले वर्ष अपनी चार साल की सेवा अवधि पूरी करेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए रिटेंशन रेट बढ़ाने का मुद्दा सम्मेलन के एजेंडे में शामिल किया गया है। मई में ऑपरेशन सिन्दूर के बाद यह पहला सेना कमांडर सम्मेलन होगा। इस बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के साथ उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए परिचालन प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की जाएगी।

सेना सम्मेलन में इन मुद्दों पर होगी चर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुभवी पूर्व सैनिकों की विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान में दिग्गज सैनिक सीमित भूमिकाओं में कार्यरत हैं, जैसे कि आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी और ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक्स के तहत सेवाएं देना। अब उनके व्यापक उपयोग की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही सेवारत सैनिकों के कल्याण और कार्मिक मामलों पर भी विमर्श होने की संभावना है।

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बनेगा त्रि-सेवा शिक्षा कोर

पिछले महीने कोलकाता में आयोजित संयुक्त कमांडर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में सरकार ने तीन संयुक्त सैन्य स्टेशनों की स्थापना और सेना, नौसेना तथा वायु सेना की शिक्षा शाखाओं के विलय से एक ‘त्रि-सेवा शिक्षा कोर’ बनाने की घोषणा की थी।

गौरतलब है कि भारतीय सेना में अग्निवीरों की भर्ती अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष की अवधि के लिए की जाती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार केवल 25 फीसदी को नियमित किया जाता है, जबकि नया प्रस्ताव इस संख्या को 75 फीसदी तक बढ़ाने का है।