टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 51 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 66 लाख रुपये तक के इनामी नक्सली भी शामिल हैं। लगातार चल रहे पुलिस और सुरक्षा बलों के अभियानों ने नक्सली संगठनों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, सरकारी पुनर्वास योजनाओं और विकास कार्यों के असर से बड़ी संख्या में नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं।

इसी क्रम में उत्तर बस्तर में सक्रिय रहे 21 माओवादी भी 18 हथियारों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं। बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को भारतीय संविधान की प्रति सौंपकर उनका स्वागत किया और समाज में सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत की शुभकामनाएं दीं।

बता दें कि इसी महीने अब तक 208 नक्सली 109 हथियारों के साथ जगदलपुर में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। वहीं आज ही कांकेर जिले की दो एरिया कमेटियों ने भी पुलिस के सामने एक साथ 21 नक्सलियों के हथियार डालने की घोषणा की।

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बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने कहा कि एक समय था जब नक्सलियों के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी में 45 सदस्य हुआ करते थे। लेकिन 2025 की शुरुआत में इनकी संख्या घटकर 18 रह गई थी, और 2025 का अंत आते आते महज 6 से 7 सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो मेंबर शेष बचे है जो दक्षिण बस्तर के जंगलों में छिपे हुए है। वहीं आईजी ने नक्सलियों से अपील भी की और उन्हें चेतावनी भी दी कि अब भी समय है वो सरेंडर कर दे अन्यथा बस्तर के तैनात डीआरजी समेत तमाम सुरक्षाबल के जवान उनसे निपटने के लिए तैयार बैठे है।

वहीं सीएम साय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा है कि छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्ला नार योजना ने माओवाद की हिंसक विचारधारा में लिप्त युवाओं में नया विश्वास जगाया है। हिंसा का रास्ता छोड़कर वे अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

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पढ़ें सीएम विष्णु देव साय का पोस्ट