टीआरपी डेस्क। ब्रेन ट्यूमर दिमाग में सेल्स की असामान्य और अनियंत्रित बढ़ोतरी के कारण बनने वाली गांठ है, जो समय के साथ दिमाग के सामान्य कार्यों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञ इसके कई प्रमुख कारण बताते हैं।
डॉ. सुभाष गिरी के अनुसार, परिवार में पहले किसी सदस्य को ब्रेन ट्यूमर होने का इतिहास हो तो इसका जोखिम बढ़ सकता है। जेनेटिक बदलाव दिमागी सेल्स को अप्राकृतिक रूप से बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
लंबे समय तक रेडिएशन या मोबाइल फोन की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स के संपर्क में रहना भी जोखिम को बढ़ा सकता है। ऐसे संपर्क से दिमागी सेल्स कमजोर पड़ते हैं और उनमें असामान्य बदलाव आने की संभावना बढ़ती है।
ज्यादा तनाव, नींद की कमी और तैलीय या जंक फूड का अधिक सेवन शरीर में टॉक्सिन बढ़ाता है, जो दिमाग के सेल्स पर नकारात्मक असर डालते हैं और ट्यूमर बनने की संभावना को बढ़ाते हैं।
केमिकल पदार्थों, पेंट या पेट्रोलियम उत्पादों के लगातार संपर्क में रहना भी दिमाग के लिए हानिकारक माना जाता है। ये रसायन धीरे-धीरे सेल्स की संरचना बदल सकते हैं।
कमजोर इम्यून सिस्टम असामान्य या क्षतिग्रस्त सेल्स से लड़ नहीं पाता। ऐसे में संक्रमण और ट्यूमर बनने का खतरा बढ़ जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर के सेल्स की क्षमता घटने लगती है, जिससे ब्रेन ट्यूमर का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, कुछ मामलों में हॉर्मोनल असंतुलन भी इसका कारण बन सकता है।


