टीआरपी। Bhairav ​​Ashtami : भगवान शंकर के रुद्रावतार माने जाने वाले भैरवनाथ का जन्मोत्सव हिंदू संवत्सर के अगहन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा। इस वर्ष 2025 में भैरव जयंती यानी भैरव अष्टमी 12 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन ब्रह्म योग और शुक्ल योग का संयोग बन रहा है। ब्रह्म योग रात तक और शुक्ल योग सुबह 8.02 बजे तक है। इस दिन अश्लेषा नक्षत्र (सुबह से शाम 6.35 बजे तक) और मघा नक्षत्र भी होगा। इस संयोग में भैरवनाथ की पूजा करना शुभदायी है। भैरवनाथ की पूजा से संकटों से मुक्ति मिलती है, काल का भय समाप्त होता है।

काल भैरव अष्टमी पर पूजन से संकट होंगे दूर

काल भैरव अष्टमी पर भैरवनाथ का पूजन करने से शनि और राहु जैसे ग्रहों का अशुभ प्रभाव नहीं होता। काल भैरव को शत्रुओं का नाश करने वाला माना जाता है, इनकी पूजा से शत्रु बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

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ऐसे करें पूजा

  • भैरव अष्टमी पर दिन में व्रत रखकर रात्रि में काल भैरव की पूजा करने का महत्व है। सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पूजा का संकल्प लेकर व्रत रखें। रात्रि में चौकी पर काला या लाल वस्त्र बिछाएं। इस पर भगवान शिव-पार्वती और काल भैरव की फोटो अथवा मूर्ति स्थापित कर पूजन करें। तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  • चार मुख वाला दीपक सरसों के तेल का प्रज्वलित करें और गुग्गल की धूप जलाएं।
  • भगवान को कुमकुम, रोली, हल्दी और लाल चंदन का तिलक लगाएं।
  • भगवान को बेलपत्र, धतूरे के फूल, काले तिल, काली उड़द की दाल, फल और पंचामृत अर्पित करें।
  • रुद्राक्ष की माला से भगवान काल भैरव के मंत्र का 108 बार जाप करें।

भोग प्रसादी

काल भैरव को उड़द की दाल से बनी वस्तुएं, जैसे बड़े, मीठी रोटियां, पूड़ी-सब्जी और गुड़ के पुए का भोग लगाया जाता है।

निम्न मंत्र का जाप करें

  • ॐ भैरवाय नमः
  • ॐ बटुक भैरवाय नमः
  • शिव चालीसा, भैरव चालीसा और काल भैरव अष्टक का पाठ करें
  • कपूर या घी के दीपक से भगवान भैरव की आरती करें
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