टीआरपी डेस्क। शिखा राजपूत तिवारी छत्तीसगढ़ कैडर की 2008 बैच की वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। वे छत्तीसगढ़ की मूल निवासी हैं और अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता तथा ई-गवर्नेंस में योगदान के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बनने का सफर तय किया। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
शिखा राजपूत तिवारी का जन्म 21 जुलाई 1976 को छत्तीसगढ़ में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी की। स्नातक स्तर पर राजनीति शास्त्र से बीए किया, उसके बाद भूगोल से एमए की डिग्री हासिल की। इसके अलावा उनके पास बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) की डिग्री भी है। पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त की।
करियर और यूपीएससी सफर
शिखा राजपूत तिवारी ने 2007 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और 2008 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं। उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1 सितंबर 2008 को भारतीय प्रशासनिक सेवा ज्वाइन की। अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने विभिन्न विभागों में कुशलता से कार्य किया।
प्रमुख पदस्थापनाएं
कोंडागांव जिले की जिलाधीश (12 अगस्त 2015 से 2 सितंबर 2016 तक)।
बेमेतरा जिले की कलेक्टर।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की पहली कलेक्टर।
नियंत्रक, नाप-तौल विभाग तथा अतिरिक्त प्रभार संचालक, आर्थिक एवं सांख्यिकी।
अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ (2021)।
सरगुजा संभाग की संभागायुक्त (2023 तक)।
बिलासपुर संभाग की संभागायुक्त (जनवरी 2024)।
वन विभाग की सचिव।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की प्रभारी सचिव (2024)।
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तथा अतिरिक्त प्रभार आयुष आयुक्त (2025)।
उपलब्धियां और सम्मान
शिखा राजपूत तिवारी को ई-गवर्नेंस में उत्कृष्ट कार्य के लिए CSI-SIG ई-गवर्नेंस अवार्ड 2021 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके “ई-माप विज्ञान” प्रोजेक्ट के लिए दिया गया। वे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान “जिंदगी अनमोल है” से भी जुड़ी रहीं और पुलिस तथा प्रशासनिक कर्मियों के लिए तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं आयोजित कीं।
शिखा राजपूत तिवारी एक प्रेरणादायक अधिकारी हैं, जिन्होंने महिलाओं के लिए आईएएस बनने का रास्ता आसान किया है। उनकी सक्रियता सोशल मीडिया पर भी दिखती है, जहां वे अपने कार्यों की जानकारी साझा करती रही हैं। वे छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
जानें शिखा तिवारी के बारे में
प्र.1. शिखा राजपूत तिवारी कौन हैं?
उ. शिखा राजपूत तिवारी छत्तीसगढ़ कैडर की 2008 बैच की वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। वे ई-गवर्नेंस और कुशल प्रशासन के लिए जानी जाती हैं।
प्र.2. शिखा तिवारी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उ. उनका जन्म 21 जुलाई 1976 को छत्तीसगढ़ में हुआ।
प्र.3. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा किस विषय में पूरी की?
उ. उन्होंने राजनीति शास्त्र में बीए, भूगोल में एमए और बीएड की डिग्री प्राप्त की।
प्र.4. शिखा तिवारी ने यूपीएससी परीक्षा कब पास की?
उ. उन्होंने 2007 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और 2008 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं।
प्र.5. उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में किस तारीख को ज्वाइन किया?
उ. उन्होंने 1 सितंबर 2008 को आईएएस ज्वाइन किया।
प्र.6. शिखा तिवारी को किस कैडर में नियुक्ति मिली?
उ. उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ।
प्र.7. कोंडागांव में शिखा तिवारी ने कौन सा पद संभाला और कब तक?
उ. वे 12 अगस्त 2015 से 2 सितंबर 2016 तक कोंडागांव जिले की जिलाधीश रहीं।
प्र.8. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में उनकी क्या भूमिका रही?
उ. वे इस जिले की पहली कलेक्टर रहीं।
प्र.9. उन्हें ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में कौन सा सम्मान मिला?
उ. उन्हें “ई-माप विज्ञान” प्रोजेक्ट के लिए CSI-SIG ई-गवर्नेंस अवार्ड 2021 मिला।
प्र.10. शिखा तिवारी वर्तमान समय में किन महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुकी हैं?
उ. उन्होंने अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, सरगुजा और बिलासपुर संभाग की संभागायुक्त, वन विभाग सचिव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई की प्रभारी सचिव, तथा चिकित्सा शिक्षा एवं आयुष आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले हैं।
प्र.11. मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी क्या पहल रही?
उ. वे “जिंदगी अनमोल है” अभियान से जुड़ी रहीं और तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं आयोजित करती रहीं।
प्र.12. सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता का उद्देश्य क्या है?
उ. वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशासनिक कार्यों व पहल की जानकारी साझा करती हैं।
प्र.13. उन्हें प्रेरणादायक अधिकारी क्यों माना जाता है?
उ. उनकी प्रशासनिक दक्षता, ई-गवर्नेंस में योगदान और महिलाओं के लिए सिविल सेवा में प्रेरक उदाहरण बनने के कारण उन्हें प्रेरणादायक अधिकारी माना जाता है।


