टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग आयुष्मान भारत और डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना में फर्जी क्लेम रोकने के लिए नया तंत्र विकसित कर रहा है। अब हर लेनदेन पर मरीज के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर बैंक की तरह तुरंत एसएमएस अलर्ट भेजा जाएगा, ताकि कार्ड ब्लॉक होने या इलाज-जांच के नाम पर अतिरिक्त राशि कटने की जानकारी तत्काल मिले।
पहले सामने आई बड़ी गड़बड़ी
विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि मरीजों से इलाज से अधिक राशि काटी जा रही है। हालिया ऑडिट में कैशलेस इलाज के बावजूद मरीजों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाने का खुलासा हुआ था। इसके बाद चार अस्पतालों पर कार्रवाई करते हुए एक-एक साल के लिए निलंबित किया गया और जुर्माना लगाया गया।
हर महीने 150 करोड़ का क्लेम
आयुष्मान भारत और राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निजी व सरकारी अस्पताल प्रतिमाह औसतन 150 करोड़ रुपये का क्लेम प्रस्तुत करते हैं। विभाग इन क्लेम्स का नियमित ऑनलाइन ऑडिट भी करता है।
शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर
किसी भी प्रकार की अनियमितता पर मरीज सीधे टोल-फ्री नंबर 104 या 14555 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। नए सिस्टम के लागू होने के बाद फर्जीवाड़े पर त्वरित अंकुश लगने की उम्मीद है।
इस नए सिस्टम की जरूरत क्यों पड़ी
पिछले कुछ समय में आयुष्मान कार्ड का उपयोग कर इलाज के नाम पर फर्जी बिलिंग, अनावश्यक जांच और बिना उपचार के राशि काटे जाने जैसी शिकायतें बढ़ी थीं। कई मामलों में मरीजों को कार्ड ब्लॉक होने या राशि कटने की जानकारी महीनों बाद मिलती थी। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान होता था, बल्कि गंभीर मामलों में मरीज जरूरत के समय इलाज का लाभ लेने से भी वंचित रह जाते थे। इन समस्याओं को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह नई व्यवस्था आवश्यक मानी गई।
नए सिस्टम के फायदे
मैसेज सिस्टम की शुरुआत से आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को इलाज से जुड़ी सभी गतिविधियों की तुरंत जानकारी मिल सकेगी। इलाज, जांच या अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर जितनी राशि काटी जा रही है, उसकी सूचना सीधे मरीज के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर पहुंचेगी। इससे उन मरीजों को सबसे अधिक फायदा होगा, जिनके कार्ड से आवश्यकता से अधिक रकम काटने की शिकायतें पहले सामने आती रही हैं।
जैसे ही किसी अस्पताल द्वारा उपचार से संबंधित कोई एंट्री की जाएगी, उसका संदेश तुरंत मरीज के फोन पर आएगा। इससे अस्पतालों द्वारा अनावश्यक जांच, अत्यधिक बिलिंग या अतिरिक्त राशि वसूली जैसी मनमानी पर प्रभावी रोक लग सकेगी। पारदर्शिता बढ़ने से मरीज समय रहते संबंधित विभाग या टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करा पाएंगे।


