जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी (Amit Jogi) ने दुर्ग में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य सरकार पर तीखा हमला किया। नक्सलवाद और माओवादी कमांडर मदवि हिड़मा को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाज़ी पर उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए।

हाल के राजनीतिक बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए जोगी ने कहा कि हिड़मा जैसे माओवादी नेता “राज्य के दुश्मन” हैं और ऐसे लोगों पर चर्चा करना भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “जो लोग संविधान में विश्वास नहीं रखते और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नहीं मानते, वे किसी सम्मान के योग्य नहीं हैं। ऐसे व्यक्ति का नाम लेना भी अनुचित है।”

अमित जोगी ने कहा कि हिड़मा को हीरो या शहीद के रूप में पेश करने की मानसिकता बेहद घातक है। भारतीय लोकतंत्र डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर आधारित है, और हिंसा तथा संविधान-विरोधी गतिविधियों को महिमामंडित करना अस्वीकार्य है।

BJP सरकार पर अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने का आरोप

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जोगी ने आरोप लगाया कि राज्य की बीजेपी सरकार का मुख्य उद्देश्य अदाणी समूह को लाभ पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि सरकार तीन चरणों वाली एक योजना के तहत छत्तीसगढ़ की संपत्तियाँ निजी हाथों में सौंपने का काम कर रही है, जिनमें से दो चरण पूरे हो चुके हैं। उनके मुताबिक उत्तर छत्तीसगढ़ की कोयला खदानें, सीमेंट, स्टील और पॉवर सेक्टर से जुड़े संसाधन अदाणी समूह को सौंपे जाने की तैयारी में हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दक्षिण छत्तीसगढ़ के लौह अयस्क भंडार भी निजी हाथों में स्थानांतरित किए जा रहे हैं। जोगी का कहना है कि यह नीति राज्य की अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

‘नक्सलवाद कमजोर, अंत करीब’
नक्सलवाद पर टिप्पणी करते हुए जोगी ने कहा कि माओवादी अब बैकफुट पर हैं और हार की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब लड़ाई खत्म होने की कगार पर है, तो आत्मसमर्पण जैसे मुद्दों पर चर्चा का कोई अर्थ नहीं है।” साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि नक्सलवाद को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए और इसके खिलाफ लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रखी जाए।

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