रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का मुद्दा गर्म हो गया है। राज्य के वन विभाग ने 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की सिफारिश केंद्र को भेजी थी। जिसके बाद केते एक्सटेंशन के लिए वन एवं पर्यावरण की मंजूरी मिल गई है।

इसका मतलब है कि अगर परियोजना आगे बढ़ती है, तो करीब 1700 हेक्टेयर जंगल की कटाई का रास्ता साफ होगा। ऐतिहासिक महत्व वाली रामगढ़ की पहाड़ियां भी इसी क्षेत्र में आती हैं, इसलिए इनके संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

बता दें कि केते एक्सटेंशन हसदेव अरण्य के जंगलों में स्थित कोल ब्लॉक से जुड़ी परियोजना है। वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल का कहना है कि अब कि 1700 हेक्टेयर जंगल की कटाई होगी। ऐतिहासिक महत्व वाली रामगढ़ की पहाड़ियों पर ख़तरा मंडराता रहेगा।

पूर्व सीएम ने क्या कहा-

उन्होंने आरोप लगाया है कि यह छत्तीसगढ़ को अडानीगढ़ बनाने की ओर भाजपा का एक और कदम है। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया है कि भाजपा को जनता और जनहित की कोई चिंता नहीं है। कांग्रेस राज्य की जनता के साथ मिलकर इस मंज़ूरी का भरपूर विरोध करेगी।

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