भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने आरक्षण पर टिप्पणी करके विवाद खड़ा करने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा और फिर बुधवार (26 नवंबर 2025) की रात तुरंत प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया। संतोष वर्मा 2011 बैच के अधिकारी हैं और निलंबन से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत थे।

इस तरह शुरू हुआ विवाद

22 नवंबर 2025 को भोपाल में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में बोलते हुए संतोष वर्मा ने आरक्षण नीति को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण व्यवस्था अब अपने मूल उद्देश्यों को पूरा कर चुकी है और अब इसे एक राजनीतिक एजेंडा की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसके अलावा उनका एक अन्य बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा, “आरक्षण एक ही परिवार में दो लोगों को नहीं मिलना चाहिए, जब तक कि कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को न दे दे।” उनके इस बयान ने ब्राह्मण समाज, एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों को एकसाथ नाराज कर दिया।

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विवाद बढ़ने के बाद कई संगठनों ने भोपाल में वल्लभ भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने संतोष वर्मा के पुतले जलाए और उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की माँग की। उनके हाथों में पोस्टर थे जिन पर लिखा था, ‘संविधान से खिलवाड़ नहीं चलेगा’, ‘अधिकारी संविधान नहीं बदल सकते।’

नोटिस का जवाब मिलने से पहले ही किया सस्पेंड

विवाद बढ़ता देख सरकार ने तुरंत नोटिस जारी किया और कहा कि संतोष वर्मा का बयान सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला है और अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करता है।

नोटिस में उन्हें 7 दिन में जवाब देने का निर्देश दिया गया था, साथ ही चेतावनी दी गई थी कि जवाब न मिलने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मामला तूल पकड़ते देख सरकार ने बिना देरी किए बुधवार (26 नवंबर 2025) की देर रात सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से उनका निलंबन आदेश जारी कर दिया।

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यह पहली बार नहीं है जब संतोष वर्मा पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई हो। वे पहले भी विवादों में घिर चुके हैं और एक मामले में जेल भी जा चुके हैं।