टीआरपी डेस्क। हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष पूर्णिमा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण रहता है, जिससे पृथ्वी के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसी कारण यह तिथि पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर चंद्र देव और भगवान विष्णु की आराधना का विधान है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन की गई पूजा और दान से जीवन की परेशानियां कम होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है.

ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 4 दिसंबर 2025 को सुबह 8 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ होकर 5 दिसंबर 2025 को सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत और पूजा 4 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी.

इस बार मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर भद्रा का साया भी रहेगा. पंचांग के अनुसार भद्रा का आरंभ सुबह 8 बजकर 36 मिनट पर होगा. हालांकि, यह भद्रा स्वर्गलोक में रहेगी, इसलिए इसका प्रभाव पृथ्वीलोक पर नहीं पड़ेगा. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा केवल पृथ्वीलोक में होने पर ही अशुभ मानी जाती है, इसलिए इस बार पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं.

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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर स्नान और दान का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 10 मिनट से सुबह 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा. सत्यानारायण पूजा का शुभ समय सुबह 10 बजकर 53 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक है. इस दिन चंद्रोदय दोपहर 4 बजकर 34 मिनट पर होगा.