Rupee Hit Record Low: डॉलर के मुकाबले रुपया 89.83 के स्तर पर आ गया। कुछ हफ्तों पहले रुपया ने 89.49 के लेवल पर रिकॉर्ड लो बनाया था
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर (US Doller) के मुकाबले इतिहास के सबसे नीचले स्तर पर पहुंच गया। यह खबर आने के बाद शेयर बाजार लाल निशान में चला गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 89.83 के स्तर पर आ गया। कुछ हफ्तों पहले रुपया ने 89.49 के लेवल पर रिकॉर्ड लो बनाया था, जो फिर टूट गया है। यह खबर देश की अर्थव्यवस्था में कुछ बड़े बदलाव की तरफ संकेत कर रही है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ सकता है।
मजबूत GDP ग्रोथ का रूपये पर कोई असर नहीं
एक तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आर्थिक वृद्धि की ओर इशारा कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। यह बात थोड़ी चौंकाने वाली है। दरअसल, आमतौर पर अच्छे इकोनॉमी ग्रोथ से किसी भी देश की करेंसी मजबूत होती है। हाल ही में जारी हुए डेटा के अनुसार, देश की वास्तविक जीडीपी (Real GDP) ग्रोथ दूसरी तिमाही में 8.2% रही, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा थी। लेकिन, इस अच्छी खबर का रुपये पर कोई खास असर नहीं दिखा।
रूपये को इसलिए नहीं मिल रही राहत
बैंकर्स और इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि इस मजबूती के बावजूद रुपये को इसलिए राहत नहीं मिल रही है, क्योंकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कोई खास प्रोग्रेस नहीं दिख रहा है। टैरिफ टेंशन भी विदेशी निवेशकों का भरोसा को तोड़ रहे हैं।
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी हेड अनिनद्या बनर्जी ने कहा कि देश की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ तो मजबूत है, लेकिन सांकेतिक जीडीपी ग्रोथ (Nominal GDP Growth) काफी धीमी है, जो कई सालों के निचले स्तर पर है।
क्या होती है सांकेतिक जीडीपी?
सांकेतिक जीडीपी वह ग्रोथ होती है, जिसमें महंगाई को समायोजित नहीं किया जाता है। दूसरी तिमाही में यह ग्रोथ सिर्फ 8.7% रही, जो वास्तविक ग्रोथ (8.2%) के काफी करीब है। कोटक बैंक की उपासना भारद्वाज ने कहा कि एक अंक वाली सांकेतिक जीडीपी ग्रोथ अभी भी बाजार की धीमी अंडरलाइन एक्टिविटी की ओर इशारा करती है।



