टीआरपी डेस्क।  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विभिन्न राज्यों में SIR ड्यूटी में लगे बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की समस्याओं को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्यों को SIR कार्य में लगे कर्मचारियों का कार्यभार कम करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की प्रतिनियुक्ति करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि, अगर कोई कर्मचारी विशेष कारणों का हवाला देते हुए छूट चाहता है तो उसके अनुरोध पर मामले के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कई बिंदुओं को रेखांकित किया है। राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि SIR के कार्य घंटे कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं। जहां किसी कर्मचारी द्वारा विशेष कारण से छूट का अनुरोध किया जाता है, वहां सरकार ऐसे अनुरोध पर विचार कर उस कर्मचारी के स्थान पर अन्य व्यक्ति को नियुक्त करेगी। यदि कार्यबल बढ़ाने की आवश्यकता हो, तो राज्य इसके लिए बाध्य होंगे।

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अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी अन्य माध्यम से राहत नहीं मिलती है, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया गया। याचिका में बताया गया था कि BLO पर अत्यधिक कार्यभार है और कई मामलों में तनाव के कारण कुछ BLO ने आत्महत्या तक कर ली।

टीवीके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि 35 से 40 BLO ने तनाव के चलते आत्महत्या कर ली है। इनमें से अधिकतर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षक हैं। समय सीमा पर काम पूरा न करने पर उनके खिलाफ नोटिस और एफआईआर तक दर्ज की गईं।

भारत निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए इसे अनुचित बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR जैसे वैधानिक कार्यों के लिए प्रतिनियुक्त कर्मचारियों को राहत देना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है, और ऐसी कठिनाइयों को दूर किया जाना चाहिए।

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