टीआरपी डेस्क। गोवा के एक नाइट क्लब में 6 दिसंबर की रात लगी भीषण आग में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई। हादसे के तुरंत बाद नाइट क्लब के मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा भारत छोड़कर थाईलैंड भाग गए थे। हालांकि गुरुवार को दोनों भाइयों को फुकेट में हिरासत में ले लिया गया है और अब उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

गोवा पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान नाइट क्लब ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ के मालिक सौरभ और गौरव लूथरा के पासपोर्ट निलंबित कर दिए थे। पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10ए के तहत की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य उन्हें विदेश में आगे यात्रा करने से रोकना था। इसी बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दोनों के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया, जिससे उन पर कानूनी दबाव और बढ़ गया।

अब जबकि लूथरा ब्रदर्स को फुकेट में डिटेन किया जा चुका है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें थाईलैंड से निर्वासित किया जाएगा या प्रत्यर्पित किया जाएगा। वर्ष 2013 में भारत और थाईलैंड के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके तहत किसी अपराध में कम से कम एक वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान होने पर आरोपी को दूसरे देश को सौंपा जा सकता है। लूथरा ब्रदर्स पर गैर-इरादतन हत्या का आरोप है, जिसमें भारत में न्यूनतम पांच वर्ष की सजा का प्रावधान है। ऐसे में यह मामला प्रत्यर्पण संधि के मानदंडों को पूरा करता है।

See also  टीआरपी स्पेशल: 10 लाख का नोट जारी करने वाला पहला देश बना वेनेजुएला, भारत में इसकी कीमत 36 रुपए!

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, निर्वासन और प्रत्यर्पण दोनों अलग-अलग विधियां हैं। निर्वासन में मेजबान देश किसी ऐसे विदेशी को देश से बाहर निकालता है, जो वहां अवैध रूप से रह रहा हो। जबकि प्रत्यर्पण एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें किसी अपराध के आरोपी को विधिवत दूसरे देश को सौंपा जाता है। लूथरा ब्रदर्स के मामले में उनके पासपोर्ट निलंबित होने के कारण वे थाईलैंड के आव्रजन कानूनों के तहत अवैध विदेशी की श्रेणी में आ गए हैं। ऐसे में थाईलैंड की सरकार उन्हें निर्वासित भी कर सकती है।

वर्तमान में दोनों को हिरासत में लेकर भारत लाने की तैयारी की जा रही है। हादसे में मारे गए लोगों को न्याय दिलाने के लिए मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।