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टीआरपी डेस्क। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दावा किया कि राज्य अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो गया है। यह बयान बालाघाट जिले में दो कुख्यात नक्सलियों के आत्मसमर्पण के कुछ घंटों बाद दिया गया। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में वर्ष 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने के संकल्प के कारण यह सफलता संभव हुई है।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बालाघाट में आयोजित ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इसके तहत बिरसा थानाक्षेत्र स्थित सीआरपीएफ कैंप में दीपक और रोहित नामक दो नक्सलियों ने सरेंडर किया। अधिकारियों के अनुसार, दीपक पर 29 लाख रुपये और रोहित पर 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई है।
बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने कहा कि उनके आत्मसमर्पण के बाद जिले में अब कोई भी कुख्यात नक्सली सक्रिय नहीं है। मिश्रा ने बताया कि दोनों लंबे समय से क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे और सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान और सतत दबाव के चलते सरेंडर संभव हुआ, जिससे क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
मुख्यमंत्री यादव ने देर शाम जारी बयान में कहा कि पुलिस के अदम्य साहस और बलिदान से 11 दिसंबर को बालाघाट से ‘लाल सलाम’ को अंतिम विदाई दी गई। उन्होंने इसे राज्य के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया।
सीएम मोहन ने यह भी बताया कि पिछले 42 दिनों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन में कुल 42 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जिन पर 7 करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार नक्सलवाद के खात्मे के लिए इतनी व्यापक और समन्वित रणनीति अपनाई गई है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि केंद्र ने 26 जनवरी 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने की समय-सीमा तय की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवादियों के सामने दो ही विकल्प थे—नवजीवन या जीवन का अंत। उन्होंने कहा कि अंतिम दो नक्सलियों के आत्मसमर्पण के साथ मध्य प्रदेश नक्सल मुक्त हो गया है।



