रायपुर। राजधानी रायपुर लगातार बढ़ती आबादी और फैलते शहरी दायरे के साथ अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। शहर की जरूरतों, बढ़ते ट्रैफिक दबाव और भविष्य के विस्तार को देखते हुए आरडीए और पीडब्लूडी ने एक संयुक्त योजना पर काम शुरू कर दिया है, जो आने वाले वर्षों में रायपुर की दिशा बदलने वाली है। इस परियोजना के लिए ग्राम कचना, लभांडी, और सड्डू में 93. 469 हेक्टेयर जमीन उपयोग में लाई जाएगी।

शांति सरोवर ओल्ड विधानसभा रोड से लाभांडी, कचना होते हुए सड्डू तक करीब 5 किमी लंबी और 45 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। यह सड़क सिर्फ एक मार्ग नहीं, बल्कि शहर के पूर्वी हिस्से को जोड़ने वाली नई रीढ़ साबित होगी। इससे कचना, शंकर नगर और आसपास की कॉलोनियों का ट्रैफिक दबाव कम होगा।

250 एकड़ का अधिग्रहण

इस कॉरिडोर के दोनों ओर 250 एकड़ जमीन को कौशल्या विहार ( पूर्व कमल विहार ) और इंद्रप्रस्थ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। जानकारी है कि इस अधिग्रहण के लिए 293 भूमि स्वामियों की जमीनें लिया जाना प्रस्तावित है, इन रकबों में कई बड़े बिल्डरों और जमीन के कारोबार से जुड़े लोगों का हिस्सा शामिल है। इस प्रस्तावित योजना में सिर्फ आवासीय कॉलोनियां ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, दुकानें, बाजार और अन्य व्यावसायिक परिसर भी विकसित किए जाएंगे। साथ ही सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज, पार्क और अन्य सभी मूलभूत सुविधाओं को आधुनिक स्तर का बनाए जाने का दावा किया जा रहा है। इसके लिए सलाहकार की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

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जनसंख्या वृद्धि के साथ शहर का दबाव बढ़ा

पिछले एक दशक में रायपुर की आबादी और वाहन संख्या दोनों तेजी से बढ़ी हैं। मौजूदा सड़कों पर भार बढ़ रहा है और नए शहरी क्षेत्रों की आवश्यकता महसूस हो रही है। नई योजना का उद्देश्य शहर को भीड़भाड़ से राहत देना और भविष्य की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए एक संगठित शहरी विस्तार तैयार करना है।

नई सड़क में 2 किमी हिस्सा पीडब्लूडी और 3 किमी की सड़क पर आरडीए काम करेगा। फिलहाल इस योजना का प्रारंभिक ड्राफ्ट और लेआउट तैयार हो चुका है। आगे भूमि अधिग्रहण, सर्वे और तकनीकी मंजूरी की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जाएगी।

इस विस्तार से रायपुर के पूर्वी हिस्से में नई कॉलोनियां, सार्वजनिक सुविधाएं, चौड़ी सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होगी। योजना का फोकस सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि ऐसा शहर तैयार करना है जो आने वाले 20-25 साल की आबादी, यातायात और शहरी जरूरतों को संभाल सके। यह प्रोजेक्ट रायपुर के मास्टर का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो शहर सुविधा के साथ नया विस्तार देगा।

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