टीआरपी डेस्क। केरल की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर का बदला हुआ रुख पार्टी के भीतर सवाल खड़े कर रहा है। हाल के दिनों में कांग्रेस नेतृत्व की अहम बैठकों से उनकी गैरमौजूदगी और भाजपा को लेकर नरम बयान इस चर्चा को और हवा दे रहे हैं कि उनके मन में कुछ अलग ही चल रहा है।

बीते दिनों राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस लोकसभा सांसदों की बैठक को छोड़कर थरूर का कोलकाता के एक कार्यक्रम में शामिल होना पार्टी गलियारों में चर्चा का विषय बना। इससे पहले सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई उस बैठक में भी वे शामिल नहीं हुए थे, जिसमें शीतकालीन सत्र की रणनीति पर मंथन होना था। वहीं, तिरुवनंतपुरम में स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की सफलता पर थरूर द्वारा विरोधी दल को बधाई देना भी राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है।

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स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने थरूर के संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम को केरल की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। ताजा रुझानों के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 101 वार्डों में भाजपा समर्थित एनडीए ने 50 सीटों पर बढ़त बना ली है। यह नतीजे कांग्रेस के लिए न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि थरूर के गढ़ में भाजपा की मजबूत होती मौजूदगी को भी दर्शाते हैं।

नगर निगम चुनावों में मिली इस सफलता से भाजपा खेमे में उत्साह है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए को मिले जनादेश पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे केरल की राजनीति में एक अहम और निर्णायक मोड़ बताया है। कुल मिलाकर, थरूर के बदले राजनीतिक मिजाज और तिरुवनंतपुरम के चुनावी नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं।