टीआरपी डेस्क। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एजेंसी ने इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें चार विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह ऑनलाइन ठगी के जरिए हजारों लोगों को निशाना बना चुका है और इसके तार विदेश, खासतौर पर चीन से जुड़े हैं।

CBI के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी लोन, निवेश योजनाओं, पोंजी स्कीम, मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM), फर्जी मोबाइल ऐप और नौकरी के झांसे देकर लोगों से ठगी की। मामले के तीन मुख्य आरोपियों को अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से इस पूरे नेटवर्क को चला रहा था।

चार्जशीट में बताया गया है कि ठगों ने खुद को छिपाने और जांच एजेंसियों से बचने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। इसमें Google विज्ञापन, बल्क एसएमएस कैंपेन, सिम-बॉक्स मैसेजिंग सिस्टम, क्लाउड सर्वर, फिनटेक प्लेटफॉर्म और दर्जनों फर्जी बैंक खातों का उपयोग शामिल है।

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जांच के दौरान CBI ने 111 फर्जी कंपनियों का पता लगाया, जिन्हें फर्जी निदेशकों, जाली दस्तावेजों और फर्जी पते के आधार पर खड़ा किया गया था। इन कंपनियों के सैकड़ों बैंक खातों के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का लेन-देन किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि एक ही खाते में बेहद कम समय में 152 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर हुई।

CBI ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में 27 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान डिजिटल डिवाइस, अहम दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए। फोरेंसिक जांच से पता चला कि विदेशी नागरिक विदेश से ही इस नेटवर्क का सीधा संचालन कर रहे थे। वहीं, दो भारतीय आरोपियों से जुड़ी एक UPI ID अगस्त 2025 तक विदेश से सक्रिय पाई गई, जिससे रियल-टाइम विदेशी नियंत्रण की पुष्टि हुई।

जांच में जिन विदेशी नागरिकों की भूमिका सामने आई है, उनकी पहचान जू यी, हुआन लियू, वेइजियान लियू और गुआनहुआ वांग के रूप में हुई है। आरोप है कि इन लोगों ने 2020 से भारत में फर्जी कंपनियां बनवाने की साजिश रची और पूरे साइबर ठगी नेटवर्क को खड़ा किया। बता दें कि यह कार्रवाई CBI के ऑपरेशन चक्र-V के तहत की गई है।

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