टीआरपी। deaf mute and visually impaired children will be taught skills : मूकबधिर और दृष्टिबाधित बच्चे दूसरों पर निर्भर न रहें और स्वयं कमाई करके अपना पालनपोषण कर सकें। इस उद्देश्य को लेकर देशभर से आ रहे 1200 से अधिक दिव्यांग बच्चों को एयरपोर्ट के समीप जैनम मानस भवन में स्वरोजगार का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविर में विविध वस्तुओं को निर्मित करने के विशेषज्ञ प्रशिक्षक 75 से अधिक वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण के साथ तैयार की गई सामग्री को बेचने का गुर भी सिखाया जााएगा।
महावीर इंटरकांटिनेंटल सर्विस आर्गेनाईजेशन मीसो, एवं छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में 19 से 23 दिसंबर तक दिव्यांगों के लिए स्किल डेवलपमेंट शिविर का आयोजन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कांवड़िया ने बताया कि लगभग 1100 मूकबधिर एवं 100 से अधिक दृष्टिबाधित बच्चों को कला सिखाई जाएगी।
75 वस्तुओं को बनाने का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में आर्गेनिक साबुन, फेसवॉस, फिनाईल, हैंडवॉश, बाटल आर्ट, माला, दिया बाती, माटी कला, नेल आर्ट, झाड़ू, वायपर, लिप्पन आर्ट, मोप मेकिंग, प्रिंटर रीफिलिंग जैसे अनेक कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण लेकर दिव्यांग बच्चे 15 से 20 हजार रुपये की कमाई करके आत्मनिर्भर बन सकेंगे। शिविर के संयोजक सीए मोतीचंद बरड़िया, केके नायक, अश्विन दोषी, मनोज कोठारी हैं, जो दिव्यांगों ठहरने, भोजन, अन्य राज्यों से आने जाने की सुविधा उपलब्ध कराएंगे।


