टीआरपी डेस्क। बांग्लादेश में कट्टरपंथी नेता एवं छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत के बाद देशभर में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। इन प्रदर्शनों में भारत विरोधी नारे लगाए गए तथा भारतीय राजनयिक परिसरों पर हमले किए गए, जिससे भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया तनाव उत्पन्न हो गया है।

शरीफ उस्मान हादी पर 12 दिसंबर को ढाका में चुनावी अभियान के दौरान मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने गोली चलाई थी। गंभीर रूप से घायल हादी को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया था, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। मौत की खबर फैलते ही ढाका सहित कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए।

प्रदर्शनकारियों ने चट्टोग्राम में भारतीय सहायक उच्चायोग के आवास पर पथराव किया तथा ढाका में भारतीय उप उच्चायुक्त के आवास के बाहर जमा होने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने आंसू गैस का उपयोग कर रोका। राजशाही में भी भारतीय राजनयिक कार्यालय की ओर मार्च की कोशिश हुई। हिंसा में अवामी लीग के कार्यालयों को आग लगाई गई तथा प्रमुख समाचार पत्रों प्रथम आलो एवं डेली स्टार के कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया गया।

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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हादी के हमलावर भारत भाग गए हैं और भारत में शरण लिए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग की। नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के कार्यकर्ता भी इन प्रदर्शनों में शामिल हुए। जुलाई ओइक्को के बैनर तले हो रहे प्रदर्शनों में भारत विरोधी नारे प्रमुख रहे।

हालात की गंभीरता को देखते हुए राजशाही एवं खुलना में भारतीय वीजा आवेदन केंद्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत पर राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया और इसे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

भारत ने बांग्लादेश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर कड़ा विरोध जताया तथा बांग्लादेशी उच्चायुक्त को तलब कर चिंता व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने चरमपंथी तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव को पूरी तरह खारिज किया तथा अंतरिम सरकार से राजनयिक परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को संसदीय चुनाव एवं जुलाई चार्टर जनमत संग्रह निर्धारित हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पूर्व भावनाओं को भड़काने के प्रयास हालात को और जटिल बना सकते हैं।

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