टीआरपी। the Jhiram Valley incident : दो दिन पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आयोजित कार्यक्रम में बयान दिया था कि 12 वर्ष पूर्व बस्तर के झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में कांग्रेसी नेताओं का हाथ था। इस बयान पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल आ गया है। उनके बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व.श्यामाचरण शुक्ल के पुत्र और पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल ने पूछा है कि ‘नड्डा जी बताएं कि जब उन्हें घटना के बारे में सब कुछ मालूम है तो वे घटना करवाने में शामिल और साजिश रचने वालों के नाम सार्वजनिक करें। एनआईए एवं न्यायिक आयोग की जांच में क्या-क्या बातें सामने आई, यह जनता के सामने आना चाहिए।
भाजपा अध्यक्ष अपनी बात सबूतों के साथ पेश करें
गौरतलब है कि जेपी नड्डा ने झीरम घाटी हमले में कांग्रेस नेताओं के नक्सलियों से संपर्क के चलते इस घटना का होना बताया है। अमितेश शुक्ल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से पूछा है कि इतने गंभीर मामले में जब कांग्रेस संगठन के कुछ अज्ञात नेताओं पर आरोप लगाया जा रहा है तो वह तथ्यात्मक होना चाहिए। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को सबूतों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। यदि सबूत हैं तो उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेजना चाहिए।
33 लोगों की हुई थी नक्सली हमले में मौत
कांग्रेस के पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल का कहना है कि 25 मई 2013 को जब कांग्रेस के अनेक नेता बस्तर क्षेत्र के सुकमा में आयोजित परिवर्तन यात्रा में शामिल होकर रायपुर लौट रहे थे। तभी, यू शेप टर्न में फंसाकर माओवादियों ने कांग्रेस नेताओं की हत्या की थी। माओवादी हमले में वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, उदय मुदलियार, योगेंद्र शर्मा सहित 33 लोगों की गोली और चाकू लगने से मृत्यु हुई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल को तीन गोली लगी थी। इलाज के दौरान 11 जून को अस्पताल में उनकी भी मृत्यु हो गई थी। नक्सलियों ने बेरहमी से गोलीबारी और चाकू से कांग्रेसी नेताओं को मारा था।
उस दौरान भाजपा की सरकार थी
झीरम घाटी में हुए हमले के दौरान राज्य में भाजपा की सरकार थी। इतना बड़ा नक्सली मूवमेंट हुआ और सरकार की गुप्तचर शाखा को इसकी जानकारी ना होना भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न करता है। इस हमले में सैकड़ों माओवादियों के शामिल होने की जानकारी सामने आ चुकी है। बसवा राजू एवं हिड़मा जैसे माओवादियों के मारे जाने पर भाजपा सरकार ने स्वयं स्वीकारा है कि झीरम हत्याकांड के मास्टर माइंड को मुठभेड़ में मारा गया है।
राजनीतिक शिगूफा न छोड़ें
अमितेश शुक्ल ने कहा कि घटना का दुखद पहलू यह है झीरम घाटी कांड को 12 वर्ष व्यतीत हो जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल सका है और भाजपा के नेता आज भी बयानबाजी कर राजनीतिक शिगूफा छोड़ रहे हैं।



