टीआरपी डेस्क। साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐसे फैसले सुनाए, जिन्होंने नागरिक अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और न्यायिक व्यवस्था पर सीधा असर डाला। मानव गरिमा से लेकर राज्यों के अधिकार और प्रशासनिक मनमानी तक, कोर्ट के ये फैसले दूरगामी माने जा रहे हैं।
ICU में हथकड़ी पर रोक
11 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलाज के दौरान किसी भी आरोपी को, चाहे उस पर कितना भी गंभीर आरोप हो, हथकड़ी या जंजीर से बांधना मानव गरिमा के खिलाफ है। खासकर ICU जैसे हालात में यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।
लॉटरी टैक्स पर राज्यों का अधिकार
इसी दिन कोर्ट ने फैसला दिया कि लॉटरी पर टैक्स लगाने का अधिकार केवल राज्यों के पास है। केंद्र सरकार इस पर टैक्स नहीं लगा सकती, क्योंकि यह राज्य सूची का विषय है।
महिला अधिकारियों को स्थायी आयोग
8 मई 2025 को कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों को केवल सहायक या स्टाफ भूमिकाओं तक सीमित रखना गलत है। उन्हें स्थायी आयोग और कमांड पदों में बराबरी का अवसर मिलना चाहिए।
आवारा कुत्तों के मामले में निर्देश बदले
22 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े पुराने निर्देश में संशोधन किया। कोर्ट ने कहा कि केवल बीमार या आक्रामक कुत्तों को ही शेल्टर होम में रखा जाएगा, सभी कुत्तों को पकड़कर हटाना सही नहीं है।
घर को बताया मौलिक अधिकार
12 सितंबर 2025 को कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक को सम्मानजनक आवास का अधिकार है। सरकार को सस्ती आवास योजनाओं में निवेश बढ़ाने और रेरा के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा।
जिला जज बनने के नियम तय
9 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वकालत और न्यायिक सेवा मिलाकर 7 साल का अनुभव रखने वाला व्यक्ति जिला जज बन सकता है। इसके लिए न्यूनतम उम्र 35 साल तय की गई।
बुलडोजर एक्शन पर सख्त रोक
13 नवंबर 2024 के आदेश को 2025 में प्रभावी करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि बिना कानूनी प्रक्रिया किसी का घर या संपत्ति नहीं तोड़ी जा सकती। नोटिस, सुनवाई और अपील का पूरा अवसर देना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर अफसरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।
बिजनेस डील में 24% ब्याज मान्य
18 नवंबर 2025 को कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कारोबारी समझौते में दोनों पक्ष 24 प्रतिशत ब्याज दर पर सहमत हैं, तो अदालत केवल इसे अधिक बताकर रद्द नहीं कर सकती। आपसी सहमति से हुई डील वैध मानी जाएगी।
अरावली की नई परिभाषा
20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला को लेकर नई व्याख्या दी। कोर्ट के अनुसार, केवल वही पहाड़ अरावली माने जाएंगे जो जमीन से 100 मीटर से अधिक ऊंचे हैं। इससे बड़े हिस्से के पर्यावरण संरक्षण पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।
सोशल मीडिया पर AI आधारित स्क्रीनिंग
28 नवंबर 2025 को कोर्ट ने कहा कि हानिकारक कंटेंट रोकने के लिए सोशल मीडिया पर AI आधारित प्री-स्क्रीनिंग हो सकती है। हालांकि यह जिम्मेदारी सरकार की नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र संस्था की होगी, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनी रहे।
इन फैसलों के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान, नागरिक अधिकारों और कानून के राज को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए।



