टीआरपी डेस्क। इंडिगो की लगातार उड़ान रद्द होने की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने एयरलाइन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तीन नई एयरलाइंस को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया है। इनमें शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस शामिल हैं।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को बताया कि पिछले एक सप्ताह में उन्होंने इन तीनों प्रस्तावित एयरलाइंस की टीमों से मुलाकात की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि शंख एयर को पहले ही NOC मिल चुका था, जबकि अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को इसी सप्ताह मंजूरी दी गई है।

शंख एयर ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी है कि वह नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अपना बेस बनाकर फुल-सर्विस एयरलाइन के रूप में परिचालन शुरू करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य देश के प्रमुख शहरों को जोड़ना है।

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वहीं अल हिंद ग्रुप द्वारा समर्थित अल हिंद एयर क्षेत्रीय उड़ानों पर फोकस करेगी। यह एयरलाइन ATR 72-600 टर्बोप्रॉप विमानों के बेड़े के साथ एक रीजनल कम्यूटर एयरलाइन के तौर पर शुरू होगी और शुरुआती चरण में दक्षिण भारत के घरेलू रूट्स पर अपनी सेवाएं देगी। फ्लाई एक्सप्रेस भी घरेलू बाजार में किफायती और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

एनओसी मिलने के बाद शंख एयर ने साफ किया है कि वह 2026 की पहली तिमाही में उड़ान सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखती है। शंख एविएशन ने बयान में कहा कि उसके विमान फिलहाल तकनीकी समीक्षा के दौर से गुजर रहे हैं और भारत में डिलिवरी के लिए तैयार किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश स्थित शंख एविएशन ही शंख एयर का संचालन करेगी। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रवण कुमार विश्वकर्मा के अनुसार, अगले दो से तीन वर्षों में बेड़े को 20 से 25 विमानों तक बढ़ाने की योजना है।

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सरकार का यह कदम इंडिगो के हालिया संकट के बाद और अहम माना जा रहा है। दिसंबर के शुरुआती दो हफ्तों में इंडिगो ने पांच हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द की थीं, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। इस स्थिति ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि किसी एक एयरलाइन के पास अत्यधिक बाजार हिस्सेदारी भविष्य में यात्रियों के लिए जोखिम बन सकती है।

अगर ये तीनों नई एयरलाइंस समय पर परिचालन शुरू करती हैं, तो घरेलू विमानन बाजार में विकल्प बढ़ेंगे और किसी एक कंपनी पर निर्भरता कम होगी। पिछले एक दशक में जेट एयरवेज, किंगफिशर और गोफर्स्ट जैसी एयरलाइंस के बंद होने तथा टाटा ग्रुप के नेतृत्व में हुए विलयों के बाद इंडस्ट्री में भारी कंसोलिडेशन देखा गया है। एयरएशिया इंडिया का एयर इंडिया एक्सप्रेस में और विस्तारा का एयर इंडिया में विलय होने के बाद इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप मिलकर घरेलू बाजार के 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से पर काबिज हैं। ऐसे में नई एयरलाइंस की एंट्री को एविएशन सेक्टर के लिए संतुलन बनाने वाला कदम माना जा रहा है।

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