टीआरपी डेस्क। दुनिया के सबसे समृद्ध मंदिरों में शामिल तिरुपति बालाजी मंदिर में वर्षों तक दान की चोरी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मंदिर में क्लर्क के पद पर तैनात रहे सीवी रवि कुमार पर भक्तों के चढ़ावे से करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप है। यह मामला पहले लोक अदालत में समझौते के बाद बंद कर दिया गया था, लेकिन अब आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने उस सेटलमेंट को रद्द करते हुए CID को नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं।

कैसे सामने आया मामला

सीवी रवि कुमार तिरुपति के मशहूर मंदिर में एक छोटा कर्मचारी था, उसे हर दिन करोड़ों रुपये के चढ़ावे गिनने का काम सौंपा गया था। दशकों तक उसने चुपचाप बहुत सारा पैसा चुराया और अपनी प्रॉपर्टी खरीदी। जब तक यह घोटाला सामने नहीं आया पकड़े जाने के बाद भी उसे कोई सजा नहीं मिली।

20 साल की चोरी, 100 करोड़ की संपत्ति

पूछताछ के दौरान रवि कुमार ने स्वीकार किया कि वह पिछले 20 साल से अधिक समय से मंदिर के दान में से पैसे निकाल रहा था। उसने बताया कि इसी रकम से उसने चेन्नई, तिरुपति और हैदराबाद में कई संपत्तियां खरीदीं, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई।

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रवि कुमार 1990 के दशक की शुरुआत में पेद्दा जीयनगर मठ से जुड़ा था। कम उम्र में ही उसे तिरुमाला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में काम मिल गया। समय के साथ वह उस विभाग में पहुंच गया, जहां रोजाना 4 से 6 करोड़ रुपये तक के दान की गिनती होती थी, जो मंदिर की सबसे संवेदनशील जिम्मेदारियों में से एक मानी जाती है।

लोक अदालत में हुआ था समझौता

30 मई 2023 को तिरुमाला पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 9 सितंबर 2023 को TTD के सहायक सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी की ओर से शिकायतकर्ता बनते हुए रवि कुमार के साथ लोक अदालत में समझौते की अर्जी दी गई। लोक अदालत ने मामला निपटा दिया और रवि कुमार को राहत मिल गई। मगर अब एक बार फिर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सेटलमेंट रद कर CID से नई जांच के आदेश दिए हैं।