टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि इस अस्थायी राहत के बाद तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की जा सकती है। बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के सरगुजा और दुर्ग संभाग के कुछ इलाकों में शीतलहर की स्थिति बनी रही।

कड़ाके की ठंड के बीच प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 4.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि बस्तर संभाग के जगदलपुर में दिन का अधिकतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान जारी करते हुए सुबह के समय कोहरा या धुंध छाए रहने की संभावना जताई है। वहीं पूरे राज्य में मौसम शुष्क बने रहने की उम्मीद है।

पेंड्रा क्षेत्र के कुछ इलाकों में भी कोहरे का असर देखा गया, जिससे यातायात की रफ्तार धीमी हो गई। मैनपाट में ठंड का असर इतना अधिक रहा कि पौधों पर ओस की बूंदें जम गईं। बढ़ती ठंड के चलते बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा भी बढ़ गया है।

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बीते एक माह के दौरान रायपुर स्थित अंबेडकर अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से ठंडा होता है। नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे ठंड को सहन नहीं कर पाते। वहीं सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का जोखिम और अधिक रहता है।

डॉक्टरों का कहना है कि पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर कई मामलों में बच्चों को एनआईसीयू और एसएनसीयू में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या सामान्य से कम तापमान होना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण माना जाता है।

सरगुजा संभाग में ठंड का प्रकोप लगातार बना हुआ है। दो दिन पहले अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घने कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई थी। ठंड के असर से अस्पतालों की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से अधिक मरीज सामने आए हैं, जबकि प्रतिदिन 2000 से ज्यादा मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

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