टीआरपी। Aam Aadmi Party : भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए जा रहेSpecial Intensive Revision (SIR) को लेकर आम आदमी पार्टी ने मतदाता सूची में अनियमितता पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज किया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान हजारों पात्र, जीवित और स्थायी नागरिकों के नाम बिना कारण, बिना सूचना और बिना सुनवाई के मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो सीधे-सीधे नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार पर हमला है। छत्तीसगढ़ में राज्य के 27 लाख 34 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है।
प्रदेश उपाध्यक्ष घनश्याम चंद्राकर ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता के नाम पर चल रही यह प्रक्रिया ज़मीनी स्तर पर भारी गड़बड़ियों, अव्यवस्था और गंभीर लोकतांत्रिक उल्लंघनों से ग्रस्त है।
प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय कुमार झा ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अब तक 2 लाख 74 हजार से ज्यादा प्रदेशवासियों ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए फॅार्म भरा है। राज्य में 7 नवंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया मात्र 45 दिन तक चली, जबकि इसे कम से कम 6 महीने करना था। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें इलेक्शन कमीशन की तरफ से नोटिस देकर अपने नाम दोबारा जुड़वाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया है। दावे और आपत्तियां 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक ही रखी गयी है। सुनवाई और वेरिफिकेशन 23 दिसंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक होंगे। अंतिम वोटर लिस्ट 21 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी। इसके लिए भी कम समय दिया गया है इसे 6 महीने बढ़ाया जाए।
प्रदेश सचिव संतोष कुशवाहा ने कहा कि जारी SIR लिस्ट में में बहुत खामियाँ और गड़बड़ियाँ हैं। बिना कारण नाम हटाए जाना सबसे गंभीर अपराध है। वर्षों से मतदान कर रहे मतदाताओं के नाम अचानक गायब हैं न कोई नोटिस, न कारण, न सुनवाई।यह प्रक्रिया असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ आदिवासी अंचल,घने जंगल,दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र और सीमित परिवहन हैं, वहाँ SIR की समय-सीमा व्यवहारिक वास्तविकताओं के बिल्कुल विपरीत रखी गयी। आम जनता को SIR की जानकारी तक नहीं मिल पायी। न व्यापक प्रचार,न ग्राम सभा/स्थानीय सूचना तंत्र,अधिकांश मतदाताओं को पता ही नहीं चला कि SIR चल रहा था।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ, स्वाति तिवारी, इमरान खान, मिहिर कुर्मा, अन्यतम शुक्ला, मिथलेश साहू, क्षीरसागर, नरेंद्र ठाकुर का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया से गरीब, बुज़ुर्ग और ग्रामीण बाहर, OTP ऑनलाइन फॉर्म, ऐप आधारित सिस्टम, डिजिटल संसाधनों से वंचित नागरिक पूरी तरह प्रभावित रहे। जवाबदेही और पारदर्शिता शून्य रही। किस अधिकारी ने नाम हटाने का निर्णय लिया स्पष्ट नहीं बताया गया। मतदाता को कारण बताने की कोई व्यवस्था नहीं रही।
यदि निर्वाचन आयोग ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाएगी।



