टीआरपी डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को वेतन सीमा में संशोधन को लेकर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें कहा गया था कि लंबे समय से वेतन सीमा में कोई बदलाव न होने के कारण कई कर्मचारी EPF कवरेज से बाहर हो रहे हैं।

यह याचिका डॉ. नवीन प्रकाश नौटियाल द्वारा दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने की। अदालत ने याचिकाकर्ता को आदेश की प्रति के साथ दो सप्ताह के भीतर विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का भी समय दिया है।

2014 से तय है 15 हजार रुपये की वेतन सीमा

केंद्र सरकार ने न्यूनतम वेतन सीमा 15 हजार रुपये प्रतिमाह तय कर रखी है, जो सितंबर 2014 से अब तक बिना बदलाव के लागू है। याचिका में इसे मनमाना और अतार्किक बताया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस सीमा का न तो महंगाई, न न्यूनतम मजदूरी और न ही प्रति व्यक्ति आय में हुई बढ़ोतरी से कोई तालमेल है।

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याचिका में यह भी कहा गया है कि 15 हजार रुपये से थोड़ा अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी EPF के दायरे से बाहर हो गए हैं, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित रह जाते हैं। इसमें 6वीं लोकसभा की लोक लेखा समिति की 34वीं रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि निचले स्तर के कर्मचारियों को कल्याणकारी योजनाओं से बाहर रखना सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के उद्देश्य को कमजोर करता है।

लोक लेखा समिति ने महंगाई के असर की भरपाई के लिए हर तीन से पांच साल में वेतन सीमा में संशोधन की सिफारिश की थी। इन सिफारिशों को जुलाई 2022 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।