रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने ऐप के प्रमुख प्रमोटरों में शामिल सौरभ चंद्राकर समेत अन्य आरोपियों की करीब 91.82 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा की गई।

ईडी ने प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए M/s Perfect Plan Investment LLC और M/s Exim General Trading – GZCO के नाम पर दर्ज 74.28 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक राशि को अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, ये दोनों कंपनियां महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपरिया से जुड़ी हुई हैं। जांच में सामने आया है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन को वैध निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया गया।

दुबई में डिटेन हुआ महादेव ऐप का मालिक

ईडी के अनुसार, महादेव ऐप का प्रचार सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने किया था। दोनों छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और फिलहाल विदेश में बताए जा रहे हैं। एजेंसी को जानकारी मिली थी कि वे संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद हैं, जिसके बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी क्रम में चंद्राकर को दुबई में डिटेन किए जाने की पुष्टि हुई है।

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Skyexchange से जुड़े सहयोगी की संपत्ति भी कुर्क

कार्रवाई के तहत Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर तिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की करीब 17.5 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं। ईडी का दावा है कि गगन गुप्ता दुबई में हवाला ऑपरेटर के रूप में सक्रिय था और उसकी व उसके परिवार के नाम दर्ज महंगी अचल संपत्तियां व तरल संपत्तियां सीधे तौर पर अवैध नकदी से खरीदी गई थीं।

कैसे चलता था अवैध सट्टेबाजी का नेटवर्क

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक और Skyexchange.com जैसे प्लेटफॉर्म कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स के लिए फ्रंट एंड के तौर पर काम करते थे। इन्हीं प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को जोड़ा जाता था और उनके वित्तीय लेन-देन को नियंत्रित किया जाता था। सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया था कि ग्राहकों को नुकसान हो और ऑपरेटरों को तय हिस्सेदारी के तहत भारी मुनाफा मिले।

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फर्जी KYC और बेनामी खातों का इस्तेमाल

जांच एजेंसी के मुताबिक, अवैध कमाई को छिपाने के लिए फर्जी और चोरी किए गए KYC दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों बैंक खाते खोले गए। इन खातों के जरिए रकम को कई परतों में घुमाया गया ताकि उसके वास्तविक स्रोत का पता न चल सके। न तो इन लेन-देन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड रखा गया और न ही किसी तरह का टैक्स अदा किया गया।

हवाला और शेयर बाजार के रास्ते धन की वापसी

ईडी ने यह भी पाया कि अपराध की आय को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो एसेट्स के जरिए विदेश भेजा गया। बाद में इसी धन को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के जरिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश के रूप में वापस लाया गया। जांच में एक संगठित ‘कैशबैक स्कीम’ का भी खुलासा हुआ है, जिसमें निवेश के बदले प्रमोटरों को 30 से 40 प्रतिशत राशि नकद लौटाई जाती थी। इस स्कीम में Salasar Techno Engineering Ltd. और Tiger Logistics Ltd. जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। ईडी के अनुसार, गगन गुप्ता को इस व्यवस्था से कम से कम 98 करोड़ रुपये की अवैध आय का लाभार्थी पाया गया।

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अब तक की कार्रवाई

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ईडी अब तक 175 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। जांच के दौरान करीब 2,600 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां जब्त, फ्रीज या कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और पांच अभियोजन शिकायतों के जरिए 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। ईडी का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी अहम खुलासे व कार्रवाई संभव है।