टीआरपी। medical treatment : ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग बीमार पड़ने पर इसे किसी के द्वारा किया गया टोना-टोटका समझकर झाड़-फूंक करवाते हैं। इससे बीमारी और गंभीर होती जाती है, जो जानलेवा साबित होती है। ऐसे लोगों को जागरूक करने के लिए निःशुल्क शिविर लगाकर डाक्टर से इलाज कराने प्रेरित किया गया।

नट और सांवरा जाति के लोगों को किया जागरूक

कार्यक्रम के दौरान नट और सांवरा समुदाय को टोना-टोटका, झाड़-फूंक से इलाज नहीं कराने, सांप काटने पर तुरंत अस्पताल जाने तथा समय पर टीकाकरण कराने प्रेरित किया गया। उल्लेखनीय है कि नट एवं सांवरा जाति के लोग परंपरागत घरेलू उपचार, ओझा-गुणिया एवं झाड़-फूंक पर अधिक निर्भर रहते हैं, जिससे गंभीर बीमारियों में समय पर इलाज न मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है। सर्पदंश, तेज बुखार, संक्रमण, हृदयघात, ब्रेन स्ट्रोक एवं गंभीर चोट जैसी परिस्थितियों में इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

मुंगेली जिला के कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार ग्राम दाऊकापा में विशेष निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से सांवरा जनजाति को स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की गई। इस शिविर में 142 सांवरा समुदाय के महिला-पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उपचार कराया। इनमें सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उच्च रक्तचाप के 12, मोतियाबिंद के 11, दाद-खाज-खुजली के 27, सर्दी-खांसी के 17, बॉडी पेन के 14, मधुमेह के 06, कमजोरी के 13, कान संक्रमण के 06, कुपोषण के 02 मरीज पाए गए। सामान्य रोगियों का मौके पर इलाज किया गया, वहीं गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल में ईलाज कराने परामर्श दिया गया।

See also  बिग ब्रेकिंग: धर्म संसद में महात्मा गांधी को अपशब्द कहने वाला कालीचरण खजुराहो से गिरफ्तार, रायपुर पुलिस ने किया अरेस्ट किया

डॉ. मनीष बंजारा ने बताया कि शिविर की विशेष बात यह रही कि परामर्श स्थानीय भाषा और संवेदनशील संवाद के माध्यम से दिया गया, जिससे लोग बिना डर और झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सके। मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, गैर-संचारी रोगों की जांच, मौसमी बीमारियों एवं सर्पदंश से बचाव की जानकारी देते हुए निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।