रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के दूधली गांव में आयोजित देश के पहले नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी कार्यक्रम का नाम शुरू से ही विवादों से जुड़ा रहा है। अब इससे जुड़ा एक और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक, जंबूरी स्थल पर टेंट और अन्य सामग्री की सप्लाई करने वाले ठेकेदार को ही 400 शौचालयों के निर्माण का ठेका दे दिया गया। इस काम पर करीब 88 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं, जिससे पूरी ठेका प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।

सूत्रों के अनुसार शुरुआत में यह ठेका दिल्ली की एक कंपनी के नाम से लिया जाना बताया जा रहा था। बाद में जब GeM पोर्टल के जरिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, तो स्थानीय वेंडर भी इसमें शामिल हुए। इसी दौरान जंबूरी स्थल पर पहले से मौजूद ठेकेदार को ही टॉयलेट निर्माण का काम सौंप दिया गया। इतना ही नहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर 16000 बेड की व्यवस्था की गई है। मगर भोजन की व्यवस्था केवल 11 हजार लोगों के लिए है।

लागत पर सवाल
स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार एक पक्का शौचालय बनाने के लिए लगभग 12,000 रुपये की सहायता देती है, जबकि जंबूरी स्थल पर बनाए गए शौचालयों की लागत 22,000 रुपये प्रति यूनिट है।
- कुल शौचालय: 400
- प्रति शौचालय लागत: 22,000 रुपये
- कुल खर्च: 88 लाख रुपये
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी राशि में अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी शौचालय बनाए जा सकते थे।
GeM खरीदी और भ्रष्टाचार
यह उल्लेखनीय है कि GeM पोर्टल के जरिए खरीदी के मामलों में पहले भी अनियमितताओं को लेकर कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में इस प्रकरण में शामिल अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कार्रवाई होगी या नहीं?
GeM के जरिए खरीदी के नाम पर भ्रष्टाचार के मामलों में पहले कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में संबंधित BEO के खिलाफ भी कार्रवाई होगी, या फिर उन्हें सिस्टम के भीतर कोई इम्यूनिटी प्राप्त है? क्या इस टेंडर प्रक्रिया की जांच होगी, या यह मामला भी बिना कार्रवाई के दबा दिया जाएगा?



