महासमुंद। जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने जलेबी रंग में इस्तेमाल किए जा रहे अखाद्य रंगों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गोल बाजार स्थित होटलों और किराना दुकानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान 4 फर्मों में अखाद्य मेटानिल येलो रंग बिक्री के लिए रखा पाया गया। इनमें मेसर्स आदित्य एजेंसी, मेसर्स बिन्देश्वरी किराना, मेसर्स महालक्ष्मी किराना और मेसर्स हरे माधव ट्रेडर्स शामिल थे।
टीम ने मौके पर नष्ट किया अखाद्य रंगों को
निरीक्षण टीम ने इन दुकानों से कुल 51 नग अखाद्य मेटानिल येलो रंग बरामद किया। खाद्य कारोबारियों को मौके पर ही नियमानुसार समझाइश दी गई और सभी अखाद्य रंग नष्ट कर दिए गए। अधिकारियों ने इस कार्रवाई को जनस्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बताया।
अभिविहित अधिकारी उमेश वर्मा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान किराना व्यापारी संघ के पदाधिकारियों से भी चर्चा की गई और बाजार से इस प्रकार के अखाद्य रंगों को पूरी तरह हटाने का आग्रह किया गया। संघ ने आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, 4 मीठा सुपारी के निगरानी नमूने भी जांच हेतु संग्रहित किए गए हैं।
अखाद्य रंग पहुंचाते हैं नुकसान
खाद्य सुरक्षा विभाग ने जनता से अपील करते हुए बताया है कि किसी भी खाद्य पदार्थ में अखाद्य रंगों का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है। जलेबी और अन्य मिठाईयों में इस्तेमाल होने वाले इन रंगों से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की शिकायतों पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
तो रहें सावधान और जलेबी में मिलाने वाले रंग अखाद्य तो नहीं हैं, वहीं आप भी अगर घर में बनने वाले व्यंजन में रंग का इस्तेमाल करते हैं तो उसे खरीदते समय यह देख लें कि रंग के डिब्बे में खाद्य या अखाद्य संबंधी क्या जानकारी लिखी हुई है।
कलेक्टर लंगेह ने निर्देश दिए हैं कि जिले में निगरानी और जांच अभियान लगातार जारी रहे ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री मिल सके। साथ ही, उन्होंने दुकानदारों और व्यवसायियों से आग्रह किया कि वे केवल स्वीकृत और खाद्य सुरक्षा प्रमाणित रंगों और सामग्रियों का ही उपयोग करें। महासमुंद जिले में इस प्रकार की कार्रवाई यह संदेश देती है कि सरकार जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए सजग है और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगी। विभाग का कहना है कि जन जागरूकता, नियमित निरीक्षण और कड़ी कार्रवाई के माध्यम से उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्यवाही में खाद्य सुरक्षा निरीक्षक और टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिनमें निरीक्षक उमेश वर्मा और अन्य सहायक अधिकारी शामिल थे।


