रायपुर। शहर की कलेक्टर गाइडलाइन दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा। 20 नवंबर को जारी की गई दरें ही आगे भी लागू रहेंगी। प्रशासन को जिस तरह अधिक दावा-आपत्तियों की उम्मीद थी, वैसी संख्या सामने नहीं आने के कारण शहरी इलाकों में दरों को लेकर स्थिति लगभग स्पष्ट मानी जा रही है। इसी वजह से शहरी क्षेत्रों में यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय लिया गया है।

हालांकि ग्रामीण इलाकों के लिए अलग से विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार गांवों में जमीन की प्रकृति, विकास कार्यों और बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए दरों में संभावित बदलाव पर मंथन जारी है।
गौरतलब है कि 20 नवम्बर 2025 को जारी की गई नई दरों का रियल एस्टेट सेक्टर के कारोबारियों समेत विपक्ष के नेताओं ने जमकर विरोध किया था। नई गाइडलाइन जारी होने के बाद से जमीनों की रजिस्ट्री की संख्या में भी भारी गिरावट आई थी।


जिसके बाद शासन द्वारा सभी जिलों के कलेक्टर को यह निर्देश दिए गए थे कि बाजार दरों की जांच करें साथ ही समीक्षा करें। सूत्रों के अनुसार सभी जिलों के कलेक्टर से समीक्षा रिपोर्ट एकत्र कर ली गई है। आगामी 10-15 दिनों के भीतर शासन-प्रशासन का निर्णय सामने आ सकता है।
विभाग के आला अधिकारी ने यह बताया कि नए फैसले से शहरी इलाकों में बदलाव होने की संभावनाएं कम है। सिर्फ ग्रामीण इलाकों में थोड़ी बहुत राहत दी जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार दिसंबर 2025 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था, उसे सिर्फ ग्रामीण इलाकों के मद्देनजर पेश किया गया। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि शहरी इलाकों में 20 नवंबर को जारी की गई दरें ही लागू रहेंगी। वहीं निष्कर्ष मानें तो शहरी क्षेत्रों के रियल एस्टेट व्यापारियों और लोगों की राहत नहीं मिलने वाली है।
गौरतलब है कि नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू होने के बाद जमीन के सरकारी भाव में 10% से लेकर 100% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2018 से स्थिर पड़े सरकारी भाव और बाजार कीमतों के बीच बढ़ते अंतर को कम करने के लिए इसे जरूरी कदम बताया गया। इसका सीधा असर रजिस्ट्री खर्च पर पड़ा ।


