टीआरपी डेस्क। UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने यूजीसी की नई नियमावली पर सुनवाई की।

पीठ ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए आगाह किया कि भारत को उन गलतियों से बचना चाहिए जो पश्चिमी देशों ने की हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हमें स्कूलों और कॉलेजों को समुदायों के आधार पर बांटने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। पीठ का मानना था कि अगर नियम बहुत ज्यादा एकतरफा हुए, तो यह शिक्षण संस्थानों की एकता और समरसता को भंग कर सकते हैं।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एक बहुत ही व्यावहारिक बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्गों के भीतर भी एक बड़ी खाई बन चुकी है। कुछ समुदाय ऐसे हैं जिन्हें आरक्षण का भरपूर लाभ मिला और वे अब सामाजिक-आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो चुके हैं, जबकि उसी वर्ग के कई अन्य लोग आज भी पीछे हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि नीति निर्माताओं को अब यह सोचने की जरूरत है कि लाभ उन तक कैसे पहुंचे जिन्हें वास्तव में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

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सुरक्षा नियमों के दुरुपयोग का डर

कोर्ट ने नियमों के संभावित दुरुपयोग पर भी कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने सवाल किया कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई व्यक्ति किसी अन्य छात्र के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो क्या नई नियमावली में उसके लिए भी कोई जवाबदेही तय की गई है? कोर्ट का मानना है कि नियम केवल एक पक्ष को सुरक्षा देने वाले नहीं, बल्कि संतुलित और न्यायसंगत होने चाहिए ताकि कोई भी छात्र खुद को असुरक्षित महसूस न करे।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।