रायपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने धर्मांतरण के मुद्दे पर कहा कि अगर किसी ने धर्मांतरण किया है और फिर भी आरक्षण लेना चाहता है, तो उसे आरक्षण छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी परंपराएं और रूढ़ियां छोड़ देते हैं, वे जनजातीय समुदाय का हिस्सा नहीं माने जाएंगे। ऐसे लोगों की डी-लिस्टिंग की जाएगी।

छत्तीसगढ़ के दौरे पर आईं डा लकड़ा ने रायपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में यूजीसी की नई गाइडलाइन को अच्छा बताया और कहा कि जो लोग इस गाइडलाइन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले इसका अध्ययन करना चाहिए और कानूनी सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह गाइडलाइन बेहद अच्छी है।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केन्द्र तथा राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं एवं शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, परंपरा के साथ-साथ पीएम आवास योजना, पीएम जनमन योजना, धरती आबा, ग्रामीण उत्कर्ष अभियान आदि के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि वह भिलाई स्थित ट्रिपल आईटी और रायपुर के एनआईटी कैंपस का दौरा किया और दोनों संस्थानों के निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी, प्रोफेसरों से समीक्षा बैठक हुई। विद्यार्थियों और शिक्षकों से चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने बताया कि वे बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरस्थ अंचलों से आकर इन संस्थानों के माध्यम से राज्य और केन्द्र सरकार की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं परंपरा तथा खान-पान को भी सहेजने का काम करें।

डॉ. लकड़ा ने कहा कि प्रदेश में ऐसे जनजातीय समुदाय जिन्होंने किसी कारखानों, संस्थानों, उद्योगों के लिए अपना जमीन दिया है उन्हें क्या लाभ हो रहा है, इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है, वहीं स्थापित उद्योगों, संस्थानों में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्तियों की भी समीक्षा की जा रही है।

एफआरए कानून की हो रही समीक्षा

डॉ लकड़ा ने बताया कि सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के संरक्षण के लिए एफआरए कानून लाया है, इसके तहत इन वर्गों को किस तरह से लाभ मिल सकेगा इस हेतु समीक्षा भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि पेशा कानून के तहत 5वीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले नियमों के पालन की भी जानकारी ली जा रही है।

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डॉ. लकड़ा ने बताया कि वे कोंडागांव, बस्तर, जगदलपुर और एनएमडीसी का भी दौरा करेंगी और जनजातीय समुदायों को मिल रहे सुविधाओं और लाभों की समीक्षा की जाएगी। इस जानकारी से संबंधित रिपोर्ट राज्य और केन्द्र सरकार को भी सौंपा जाएगा।