रायपुर मंत्रालय में मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक लेते उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा।

टीआरपी। cg-cabinet-sub-committee-meeting-: छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान राजनीतिक, सामाजिक और कर्मचारी आंदोलनों के समय दर्ज किए गए प्रकरणों को वापस लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंत्रालय में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में इन मामलों की समीक्षा की गई और कई प्रकरणों को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति हेतु अनुशंसित करने का निर्णय लिया गया।

यह निर्णय छत्तीसगढ़ के उन हजारों कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है, जो वर्षों से अदालती चक्कर काट रहे हैं। सरकार के इस कदम से लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज हुए ‘दुर्भावनापूर्ण’ मुकदमों का खात्मा होगा और प्रभावित लोगों के करियर व सामाजिक जीवन पर लगा दाग धुलेगा।

“लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा आवश्यक” – विजय शर्मा

बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीति में लोकतांत्रिक विरोध का सदैव सम्मान होना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “राजनीति मतभेद का विषय है, मनभेद का नहीं।” शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार द्वारा राजनीतिक दुर्भावना के चलते अनेक कार्यकर्ताओं और संगठनों पर द्वेषपूर्ण तरीके से मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनकी अब विधि सम्मत समीक्षा की जा रही है।

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इन श्रेणियों के केस होंगे वापस

उपसमिति ने विभिन्न आंदोलनों के दौरान दर्ज राजज्ञा उल्लंघन, लोक सेवक के कार्य में बाधा डालने जैसी धाराओं से संबंधित प्रकरणों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में मुख्य रूप से इन समूहों को राहत देने पर फोकस रहा:

  • राजनीतिक संगठन के कार्यकर्ता।
  • गैर-राजनीतिक और सामाजिक संगठन
  • कर्मचारी संगठन और उनके आंदोलनकारी सदस्य।

उच्च स्तरीय समिति ने दिए निर्देश

बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, अपर मुख्य सचिव (गृह) मनोज पिंगवा और विधि सचिव सुषमा सावंत सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उपसमिति ने गृह विभाग को निर्देश दिए हैं कि पूर्व में अनुशंसित मामलों की सतत निगरानी की जाए और उनका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

उपसमिति द्वारा अनुशंसित इन प्रकरणों को अब अंतिम मुहर के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता वाली अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही संबंधित जिलों के अभियोजन अधिकारियों को केस वापस लेने की वैधानिक प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।

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