टीआरपी डेस्क। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के नियमों में बदलाव करते हुए सर्विस में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने के रास्ते बंद कर दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई उम्मीदवार एक बार IAS, IPS या IFS बन जाता है, तो उसे भविष्य की परीक्षाओं में बैठने के लिए अब कड़े प्रतिबंधों का सामना करना होगा।
नए नियम: अब सिर्फ एक अतिरिक्त मौका
यूपीएससी के CSE-2026 नोटिफिकेशन के अनुसार, अब ‘मल्टीपल अटेंप्ट्स’ के द्वार बंद कर दिए गए हैं। प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
- एक आखिरी मौका: जिन्हें CSE-2025 या उससे पहले कोई सर्विस मिली है, उन्हें अपने बचे हुए अटेंप्ट इस्तेमाल करने के लिए CSE-2026 या 2027 में केवल एक बार शामिल होने की छूट मिलेगी। इसके बाद यानी CSE-2028 से परीक्षा देने के लिए वर्तमान पद से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।
- चयन के बाद पात्रता खत्म: यदि कोई उम्मीदवार पहले से ही IAS या IFS का सदस्य है, तो वह CSE-2026 के लिए पात्र नहीं होगा।
- मेन्स से बाहर: अगर कोई छात्र प्रीलिम्स पास कर लेता है लेकिन इसी बीच पुरानी परीक्षा के आधार पर उसकी नियुक्ति IAS/IFS में हो जाती है, तो उसे मुख्य परीक्षा (Mains) में बैठने नहीं दिया जाएगा।
- IPS के लिए दोबारा मौका नहीं: जो उम्मीदवार पहले से ही IPS हैं, वे दोबारा IPS कैडर चुनने के पात्र नहीं होंगे।
ट्रेनिंग और अलॉटमेंट के कड़े प्रावधान
आयोग ने ट्रेनिंग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। IAS, IPS या ग्रुप ए सेवा मिलने के बाद, ट्रेनिंग से छूट केवल एक बार दी जाएगी। यदि उम्मीदवार न तो ट्रेनिंग जॉइन करता है और न ही छूट लेता है, तो उसका पिछला अलॉटमेंट रद्द कर दिया जाएगा।



