टीआरपी। रायपुर
राजधानी रायपुर के सड्डू और डूंडा में शिक्षा की नई क्रांति के रूप में ‘ज्ञानोदय हब’ का शुभारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जल्द ही इस अत्याधुनिक परिसर का उद्घाटन करेंगे। आदिम जाति एवं पिछड़ा वर्ग विकास विभाग द्वारा तैयार इस हब का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों को एक ही छत के नीचे आवास और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग उपलब्ध कराना है।
रायपुर में किराए के कमरों और महंगे कोचिंग संस्थानों के बोझ तले दबे ग्रामीण छात्रों के लिए यह एक वरदान साबित होगा। अब कमजोर वर्ग के छात्र IAS, IIT, NEET और NDA जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी आधुनिक सुविधाओं वाले सरकारी हॉस्टल में रहकर निःशुल्क कर सकेंगे।
कालीबाड़ी और पेंशनबाड़ा में बनेंगे नए 4 मंजिला हॉस्टल
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने सड्डू और डूंडा स्थित हॉस्टल परिसरों का निरीक्षण किया। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि कालीबाड़ी और पेंशनबाड़ा स्थित पुराने छात्रावासों के स्थान पर अब आधुनिक सुविधाओं से लैस नए चार मंजिला हॉस्टल बनाए जाएं। सड्डू का पूरा परिसर लगभग 18 एकड़ और डूंडा का परिसर 10 एकड़ से अधिक भूमि में फैला हुआ है।
इन छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को सिविल सर्विसेस, एनडीए, क्लेट, नेट, स्लेट, पीईटी और पीएमटी जैसी सभी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष तैयारी कराई जाएगी।
35 करोड़ की लागत से तैयार हुई हाई-टेक सुविधाएं
नवनिर्मित हॉस्टलों में एकलव्य ड्रापर छात्रों के लिए 500 सीटर कोचिंग हब, ओबीसी बालक-बालिकाओं के लिए 100-100 सीटर छात्रावास और अनुसूचित जनजाति की छात्राओं के लिए 250 सीटर व्यावसायिक शिक्षा केंद्र शामिल हैं। इस पूरी परियोजना की लागत लगभग 35 करोड़ 30 लाख 64 हजार रुपये है।
निरीक्षण के दौरान बोरा ने अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखने और छात्रों की जरूरतों के अनुसार हर आधुनिक सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कुल क्षमता: सड्डू और डूंडा में लगभग 1000 सीटें।
परियोजना लागत: 35,30,64,000 रुपये।
सुविधा: सिविल सर्विसेस, मेडिकल, इंजीनियरिंग और डिफेंस परीक्षाओं की कोचिंग।
कैंपस साइज: सड्डू (18 एकड़) और डूंडा (10 एकड़)।
मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन के बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग का लक्ष्य है कि इस सत्र से ही छात्रों को कोचिंग और आवास की सुविधा मिलनी शुरू हो जाए, जिससे प्रदेश के दूरस्थ अंचल के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकें।


